IMD Monsoon Update: मानसून के अंडमान को हिट करने की तारीख को लेकर आया बड़ा अपडेट, IMD ने दिया ये अलर्ट

IMD Monsoon Prediction: अंडमान में दस्तक देने के बाद मानसून अपनी यात्रा पश्चिम की ओर जारी रखता है। भारतीय मुख्य भूमि पर मानसून की आधिकारिक शुरुआत 1 जून को केरल तट से होती है। हालांकि, अंडमान में इसके समय से पहले पहुंचने से यह उम्मीद जगी है कि मुख्य भूमि पर भी राहत जल्द मिल सकती है

अपडेटेड May 13, 2026 पर 7:29 PM
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बंगाल की खाड़ी में बने एक वेल-मार्क्ड कम दबाव के क्षेत्र के कारण मानसून की चाल तेज हो गई है

IMD Monsoon Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के करोड़ों किसानों और आम जनता के लिए राहत भरी खबर साझा की है। भीषण गर्मी के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) की प्रगति को लेकर विभाग ने बड़ा अपडेट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में बने एक वेल-मार्क्ड कम दबाव के क्षेत्र के कारण मानसून की चाल तेज हो गई है और इसके इस सप्ताह के अंत तक अंडमान पहुंचने की प्रबल संभावना है।

अंडमान में इस तारीख को एंट्री

IMD के विश्लेषण के मुताबिक मानसून 16 मई 2026 के आसपास दक्षिण बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में दस्तक दे सकता है। आमतौर पर मानसून अंडमान में 20 मई के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार इसके समय से पहले आने की उम्मीद है। आपको बता दें कि पिछले साल यानी 2025 में मानसून 13 मई को ही अंडमान पहुंच गया था।


कम दबाव का क्षेत्र बना मानसून का मददगार

मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक वेल-मार्क्ड कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) भी सक्रिय है जो समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर तक फैला हुआ है। यह सिस्टम मानसून की धाराओं को आगे धकेलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

केरल में कब पहुंचेगा मानसून?

अंडमान में दस्तक देने के बाद मानसून अपनी यात्रा पश्चिम की ओर जारी रखता है। भारतीय मुख्य भूमि पर मानसून की आधिकारिक शुरुआत 1 जून को केरल तट से होती है। हालांकि, अंडमान में इसके समय से पहले पहुंचने से यह उम्मीद जगी है कि मुख्य भूमि पर भी राहत जल्द मिल सकती है।

अल-नीनो का खतरा: इस साल कम बारिश की आशंका

मानसून की जल्दी आहट के बीच मौसम विभाग पहले एक चिंताजनक आंकड़े की ओर भी इशारा कर चुका है। IMD के अनुसार इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। भारत में औसतन 80 सेमी बारिश होने का अनुमान है, जबकि दीर्घकालिक औसत 87 सेमी है। इसकी मुख्य वजह अल-नीनो (El Nino) परिस्थितियों का उभरना है, जो आमतौर पर भारत में मानसून की बारिश को कमजोर करता है। 1 मई को जारी पूर्वानुमान में भी बताया गया था कि प्रशांत महासागर में स्थितियां अल-नीनो की ओर बढ़ रही हैं।

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