Mahoba Anganwadi Case: महोबा में मृत आंगनबाड़ी सहायिका को ‘नौकरी से निकालने’ का नोटिस, विभाग की बड़ी लापरवाही आई सामने

Mahoba Anganwadi Case: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां पर एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जिसका निधन 18 महीने पहले ही चुका था, उसे काम पर न आने की वजह से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, और उसे नौकरी से निकालने की धमकी दी गई है।

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 1:41 PM
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महोबा में मृत आंगनबाड़ी सहायिका को ‘नौकरी से निकालने’ का नोटिस, विभाग की बड़ी लापरवाही आई सामने

Mahoba Anganwadi Case: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां पर एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जिसका निधन 18 महीने पहले ही चुका था, उसे काम पर न आने की वजह से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, और उसे नौकरी से निकालने की धमकी दी गई है।

मृतक महिला पार्वती को जारी किए गए इस नोटिस से उनका परिवार सदमे में हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पार्वती की मृत्यु के तुरंत बाद अधिकारियों को मृत्यु प्रमाण पत्र सौंप दिया था और उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि यह नोटिस कैसे जारी किया गया।

परिवार के अनुसार, 49 साल की पार्वती का निधन 1 नवंबर, 2024 को हुआ था। उनके पति किशनलाल ने बताया कि उन्होंने पार्वती की मृत्यु के आठ दिनों के अंदर राज्य महिला एवं बाल विकास विभाग को मृत्यु प्रमाण पत्र सौंप दिया था।


18 महीने बाद मिला नोटिस

अब, 18 महीने बाद, किशनलाल को एक नोटिस मिला। बाल विकास परियोजना अधिकारी यास्मीन जहां ने इस नोटिस में साइन किया है, जिसमें कहा गया है कि निरीक्षण के दौरान आंगनवाड़ी केंद्र बंद पाया गया। इसमें यह भी बताया गया है कि 3-6 साल के बच्चे प्राथमिक शिक्षा से वंचित हो रहे थे, और पार्वती ने पोषण ट्रैकर पर डेटा भी अपडेट नहीं किया था, जिसका उपयोग केंद्र यह निगरानी करने के लिए करता है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को मिड डे मिल के तहत पका हुआ भोजन परोसा जा रहा है या नहीं।

किशनलाल और परिवार के अन्य सदस्य इस नोटिस के कारण हुई लापरवाही और उदासीनता देखकर हैरान हैं। पार्वती के बेटे महेश ने कहा, "मैं यह नोटिस लेकर स्वर्ग जाऊंगा। वहां मैं अपनी मां से पूछूंगा कि वह 18 महीने से काम पर क्यों नहीं जा रही हैं।"

कौन ले रहा है मानदेय?

इस नोटिस ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है। परिवार के सदस्य और ग्रामीण सोच रहे हैं, अगर पार्वती अभी भी सरकारी रिकॉर्ड में हैं, तो उन्हें हर महीने मिलने वाला मानदेय कौन ले रहा है? वे इस बात से भी हैरान हैं कि राज्य के अधिकारी 18 महीने तक एक कर्मचारी की मौत से अनजान कैसे रहे।

नोटिस जारी करने वाली बाल विकास परियोजना अधिकारी यास्मीन जहां ने कहा कि उनसे कोई गलती नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "निरीक्षण के दौरान मैंने उन्हें अनुपस्थित पाया और नोटिस जारी कर दिया। मुझसे कोई गलती नहीं हुई है। अगर उनकी मृत्यु हो गई है, तो आंगनवाड़ी प्रबंधक जवाब देंगे। इस मामले को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।"

इस बीच, पार्वती के परिवार ने अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है।

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