मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की वजह से भारत में हो रहे गैस संकट से निपटने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने LPG की ज्यादा खेप अब नए स्रोतों से मंगा रहा है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को जानकारी दी है कि, अमेरिका से भी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानि एलपीजी (LPG) मंगा रही है। यह जानकारी मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि सरकार LPG के स्त्रोतो में विविधता लाने की प्रयास कर रही है।
सुजाता शर्मा ने कहा, “हमारी तेल कंपनियों ने अमेरिका से एलपीजी लेना शुरू कर दिया है। सरकार एलपीजी के स्रोतों में विविधता लाने के लिए भी हर संभव प्रयास कर रही है।” बता दें कि, अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रुकने से दुनिया भर में शिपिंग प्रभावित हुई है। इसका असर भारत की कच्चे तेल, LPG और LNG सप्लाई पर भी पड़ा है। सरकार के कदमों के बावजूद रेस्तरां, होटल और कई उद्योगों को LPG की सीमित सप्लाई का असर महसूस होने लगा है। इन सबके बीच मंगलवार को सरकार ने बड़ी जानकारी दी है।
तनाव के बीच भारत ने गैस सप्लाई को मजबूत करने के लिए नए कदम उठाए हैं। इसी के तहत देश ने अब अमेरिका से भी कुकिंग गैस आयात करना शुरू कर दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत ने करीब 20 बड़े गैस कैरियर जहाज़ों के जरिए लगभग 10 लाख टन एलपीजी हासिल की है, जिसमें अधिकतर गैस अमेरिका से आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि अब भी ज्यादातर गैस खाड़ी देशों से आती है, लेकिन तेल कंपनियों ने अमेरिका से भी खरीद बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि सप्लाई के स्रोत बढ़ाने से देश को ज्यादा कच्चा तेल और गैस मिल रही है, जिससे भविष्य में सप्लाई को लेकर स्थिति बेहतर हो सकती है। अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच भारत अपनी गैस सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग देशों से एलपीजी खरीद रहा है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक देश वैश्विक कंपनियों के जरिए गैस हासिल कर रहा है, जिनमें यूएई की एडनॉक और अल्जीरिया की सरकारी कंपनी सोनात्राक समेत कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। इसके साथ ही भारत नए साझेदार देशों की भी तलाश कर रहा है और अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों ने भी भारत को एलपीजी बेचने में रुचि दिखाई है। इससे उम्मीद है कि भविष्य में गैस सप्लाई और मजबूत हो सकेगी।