किलर साउंड! पोल्ट्री फार्म में 140 मुर्गियों की हार्ट अटैक से मौत, अब DJ वाले पर हुआ ये एक्शन

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इलाके के डीजे संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है कि कहीं ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। इस घटना के बाद जिले में बिना अनुमति डीजे चलाने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया गया है

अपडेटेड May 02, 2026 पर 5:59 PM
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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में कुछ दिनों पहले एक अजीबोगरीब मामला सामने आया था।

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में कुछ दिनों पहले एक अजीबोगरीब मामला सामने आया था। यहां बारात में आए डीजे की तेज आवाज होने के चलते पोल्ट्री फार्म की मुर्गियों की मौत हो गई। आरोप है कि तेज आवाज में लंबे समय तक डीजे म्यूजिक बजने की वजह से यह घटना हुई। यह मामला सुल्तानपुर के दरियापुर गांव का है। पोल्ट्री फार्म के मालिक साबिर अली ने शिकायत करते हुए कहा कि तेज आवाज से मुर्गियां बुरी तरह घबरा गईं और थोड़ी ही देर में करीब 140 मुर्गियों की मौत हो गई।

पुलिस ने लिया ये एक्शन

वहीं शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इलाके के डीजे संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है कि कहीं ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। इस घटना के बाद जिले में बिना अनुमति डीजे चलाने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पक्षी तेज आवाज और तनाव के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। अचानक या लगातार ऊंची आवाज सुनने से उनमें घबराहट बढ़ सकती है। ऐसे हालात में उन्हें सदमा या कार्डियक अरेस्ट तक हो सकता है, खासकर पोल्ट्री फार्म जैसी बंद जगहों पर। विशेषज्ञों के मुताबिक, मुर्गियां वातावरण में होने वाले बदलावों से जल्दी प्रभावित होती हैं।


किलर साउंड से हुआ मुर्गियों की मौत!

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मुर्गियों की मौत में “ध्वनि से पैदा हुआ तनाव” यानी एकॉस्टिक स्ट्रेस की भूमिका हो सकती है। विशेषज्ञों ने माना कि तेज आवाज की वजह से पक्षियों पर गंभीर असर पड़ सकता है। तेज आवाज और जानवरों की परेशानी के बीच संबंध पहले भी कई बार सामने आ चुका है। त्योहारों में पटाखों की तेज आवाज से पक्षियों की मौत और पालतू जानवरों के घबराने की घटनाएं पहले भी देखी गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक बहुत तेज आवाज होने पर जानवरों के खाने-पीने, सोने और सामान्य व्यवहार पर असर पड़ता है। हालांकि, एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत का यह मामला लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बन गया है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

इस घटना के बाद ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। लाउडस्पीकर और डीजे बजाने के लिए सरकारी अनुमति लेना जरूरी होता है। साथ ही, आवाज की एक तय सीमा भी निर्धारित की गई है, खासकर रिहायशी और संवेदनशील इलाकों में। नियम तोड़ने पर जुर्माना लगाया जा सकता है और उपकरण भी जब्त किए जा सकते हैं। सुल्तानपुर प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस घटना के बाद नियमों को और सख्ती से लागू किया जाएगा। आमतौर पर डीजे और तेज आवाज से जुड़े मामले इंसानों की परेशानी तक ही सीमित रहते हैं, लेकिन सुल्तानपुर की इस घटना ने दिखाया है कि तेज शोर का असर जानवरों पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि कई बार आवाज कम रखना सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि जरूरी जिम्मेदारी भी होती है।

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