India China Relations: भारत और चीन के संबंधों में ऐतिहासिक सुधार! नई दिल्ली और बीजिंग में व्यापार-LAC पर बड़ी चर्चा

India China Relations: चीन ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को "राइवल के बजाय कोऑपरेटिव पार्टनर" और खतरों के बजाय विकास के मौकों के तौर पर देखना चाहिए। यह बात विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन के एग्जीक्यूटिव वाइस विदेश मंत्री मा झाओक्सू के बीच नई दिल्ली में हुए भारत-चीन स्ट्रेटेजिक बातचीत के नए दौर के बाद आई

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 9:18 AM
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India China Relations: तेजी से बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और चीन के बीच संबंधों में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है। इस क्रम में भारत और चीन ने मंगलवार (10 फरवरी) को अपने रिश्तों में स्थिरता लाने की कोशिश की। बीजिंग ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को "राइवल के बजाय कोऑपरेटिव पार्टनर" और खतरों के बजाय विकास के मौकों के तौर पर देखना चाहिए। यह बात विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन के एग्जीक्यूटिव वाइस विदेश मंत्री मा झाओक्सू के बीच नई दिल्ली में हुए भारत-चीन स्ट्रेटेजिक बातचीत के नए दौर के बाद आई। मा अभी BRICS से जुड़ी मीटिंग के लिए भारत में हैं।

भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने X पर लिखा, "10 फरवरी, 2026 को चीन के विदेश मामलों के एग्जीक्यूटिव वाइस मिनिस्टर मा झाओक्सू ने नई दिल्ली में भारत के विदेश सचिव, माननीय विक्रम मिस्री के साथ चीन-भारत स्ट्रेटेजिक डायलॉग का एक नया राउंड किया। दोनों पक्षों ने इंटरनेशनल और रीजनल हालात, अपनी-अपनी अंदरूनी और बाहरी पॉलिसी, एक जैसे फायदे वाले इंटरनेशनल और रीजनल मुद्दों और चीन-भारत रिश्तों पर दोस्ताना, साफ और गहराई से बातचीत की।"

बातचीत के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री और मा झाओक्सू ने मुख्य रूप से द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और फिर से बनाने के लिए दोनों पक्षों द्वारा उठाए गए कदमों पर ध्यान केंद्रित किया। पूर्वी लद्दाख में चार साल से ज्यादा समय से चल रहे सैन्य गतिरोध के बाद गंभीर तनाव में आ गए थे।


भारत-चीन स्ट्रेटेजिक डायलॉग के फ्रेमवर्क के तहत हुई मीटिंग में दोनों पक्षों ने एक अपडेटेड एयर सर्विस एग्रीमेंट को फाइनल करने की जरूरत पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में पॉजिटिव मोमेंटम की समीक्षा की।

अहम मुद्दों पर चर्चा

दोनों के बीच मेलजोल बढ़ाकर और संवेदनशील मुद्दों पर चिंताओं को दूर करके संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। जायसवाल ने संवेदनशील मुद्दों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। लेकिन यह समझा जाता है कि भारतीय पक्ष रेयर अर्थ मिनरल्स से संबंधित चीन के एक्सपोर्ट कंट्रोल उपायों को लेकर चिंतित है।

भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय ने कहा कि बातचीत में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों की बड़ी रेंज शामिल थी। इसमें खास तौर पर रिश्तों को स्थिर करने और फिर से बनाने और बातचीत को आगे बढ़ाने के तरीकों की पहचान करने पर ध्यान दिया गया।

रिश्तों में तेजी से सुधार

गलवान घाटी विवाद के बाद लंबे समय तक जमे रिश्तों में अब धीरे-धीरे नरमी दिखाई दे रही है। दोनों देशों के बीच वर्षों बाद डायरेक्ट हवाई सेवाएं फिर से शुरू हुई हैं। इसके साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा भी दोबारा शुरू कर दी गई है। भारत ने चीनी नागरिकों को टूरिस्ट वीजा जारी करना फिर से शुरू किया है। इससे यात्रा और संवाद आसान हुआ है।

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चीनी राजदूत शू ने हाल ही में बताया कि भारत और चीन के बीच व्यापार बढ़कर 155.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो साल-दर-साल 12% से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि चीन को भारत का निर्यात 9.7% बढ़ा है। इसे उन्होंने दो बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाओं का संकेत बताया।

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