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विदेशी खाद पर निर्भरता होगी खत्म! यूरिया के विकल्प पर सरकार का बड़ा दांव, 66% सस्ती भी पड़ेगी

Urea Alternative: भारत सरकार यूरिया के विकल्प के तौर पर ग्रीन अमोनिया का बड़ा परीक्षण कर रही है। छह राज्यों में 10,000 एकड़ खेतों पर इसकी आजमाइश होगी। दावा है कि इससे खाद की लागत एक-तिहाई तक आ सकती है और आयात पर निर्भरता घट सकती है। समझिए पूरी तस्वीर।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Oct 29, 2026 पर 6:40 PM
विदेशी खाद पर निर्भरता होगी खत्म! यूरिया के विकल्प पर सरकार का बड़ा दांव, 66% सस्ती भी पड़ेगी
भारत हर साल खाद और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर बड़ी रकम खर्च करता है।

भारत में यूरिया की जगह ग्रीन अमोनिया इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही है। सरकार छह राज्यों में 10,000 एकड़ खेतों पर इसका परीक्षण कर रही है। मकसद यह पता लगाना है कि इससे खेती की लागत घट सकती है या नहीं। साथ ही, खाद का इस्तेमाल भी ज्यादा असरदार तरीके से हो सकेगा। सरकार देश में ग्रीन अमोनिया की मांग बढ़ाना भी चाहती है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने Moneycontrol को यह जानकारी दी है।

ग्रीन अमोनिया पर सरकार का फोकस क्यों

अमोनिया का इस्तेमाल यूरिया और दूसरी नाइट्रोजन वाली खाद बनाने में होता है। अभी इसे बनाने के लिए ज्यादातर प्राकृतिक गैस से मिलने वाली हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है। यानी इसका उत्पादन जीवाश्म ईंधन पर निर्भर है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर अमोनिया देश में ही बनाता है। फिर भी कुछ मात्रा विदेशों से मंगानी पड़ती है।

अब सरकार यह जांच रही है कि ग्रीन अमोनिया को यूरिया में बदले बिना सीधे खेत की मिट्टी में डाला जा सकता है या नहीं। ग्रीन अमोनिया बनाने के लिए प्राकृतिक गैस के बजाय सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय बिजली का इस्तेमाल करके हाइड्रोजन तैयार की जाती है।

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