INS Taragiri: दुनिभर में जारी जंग के बीच ब्रह्मोस मिसाइल से लैस भारत का 'तारागिरी' तैयार, इस दिन होगा कमीशन

INS Taragiri : INS तारागिरी को ‘कंबाइंड डीजल या गैस’ (CODOG) तकनीक से चलने के लिए तैयार किया गया है, जिससे यह तेज रफ्तार और लंबे समय तक ऑपरेशन करने में सक्षम बनता है। इस युद्धपोत को कई तरह के समुद्री मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें बेहद आधुनिक हथियार सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और पनडुब्बी रोधी सिस्टम शामिल हैं।

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 9:36 PM
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स्वदेशी तकनीक से तैयार किए गए आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट INS Taragiri (F41) भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा

28 फरवरी 2026 के बाद दुनिया पहले जैसी नहीं रही। भारत समेत दुनिया के बड़े देश इस युद्ध से प्रभावित हुए। वहीं दुनियाभर में छाए जंग के इस बादल के बीच भारतीय नौसेना की ताकत में एक बड़ा इजाफा होने वाला है। नौसेना जल्द ही अपने बेडे में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक और जहाज को शामिल करने जा रही है। स्वदेशी तकनीक से तैयार किए गए आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट INS Taragiri (F41) को अगले महीने 3 अप्रैल को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह जहाज भारत की आत्मनिर्भर नौसेना बनने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

देश में बना है INS तारागिरी 

मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में तैयार किया गया यह फ्रिगेट पुराने डिजाइनों की तुलना में काफी आधुनिक है, जिसका डिजाइन ज्यादा बेहतर और रडार से बचने वाला है। INS तारागिरी में 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, जो देश के मजबूत होते घरेलू उद्योग और 200 से ज्यादा MSMEs की भागीदारी को दिखाता है।


लगे हैं बेहद एडवांस सिस्टम

INS तारागिरी को ‘कंबाइंड डीजल या गैस’ (CODOG) तकनीक से चलने के लिए तैयार किया गया है, जिससे यह तेज रफ्तार और लंबे समय तक ऑपरेशन करने में सक्षम बनता है। इस युद्धपोत को कई तरह के समुद्री मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें बेहद आधुनिक हथियार सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और पनडुब्बी रोधी सिस्टम शामिल हैं। ये सभी सिस्टम एक एडवांस कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े हुए हैं, जिससे जहाज का दल किसी भी खतरे का तेजी और सटीकता के साथ जवाब दे सकता है।

होगी बड़ी भूमिका 

INS तारागिरी को सिर्फ युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि बदलते समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, ताकि यह कूटनीतिक मिशन और मानवीय सहायता व आपदा राहत जैसे कामों में भी उपयोगी साबित हो सके। इसकी खास डिजाइन इसे युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों से लेकर राहत कार्यों तक हर तरह के मिशन के लिए सक्षम बनाती है। भारतीय नौसेना लगातार खुद को एक मजबूत, भरोसेमंद और आत्मनिर्भर शक्ति के रूप में विकसित कर रही है, जो देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करती है। तारागिरी इसी दिशा में एक अहम कदम है, जो भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का प्रतीक है और भविष्य में देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

ब्रह्मोस मिसाइल से है लैस

INS तारागिरी ‘नीलगिरी क्लास’ (प्रोजेक्ट 17A) का चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे 28 नवंबर 2025 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने नौसेना को सौंपा था। यह जहाज पुराने लिएंडर क्लास के उसी नाम वाले पोत की जगह लेता है, जो 1980 से 2013 तक सेवा में रहा था। करीब 75% स्वदेशी तकनीक से बना यह फ्रिगेट भारत की आत्मनिर्भरता को दिखाता है। इसमें कई आधुनिक हथियार और सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम और हवाई सुरक्षा के लिए MRSAM जैसी उन्नत तकनीक शामिल है, जिससे यह समुद्र में एक मजबूत और आधुनिक रक्षा क्षमता प्रदान करता है।

INS तारागिरी में बेहद आधुनिक कॉम्बैट सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें MFSTAR रडार, 76 मिमी सुपर रैपिड गन और 30 मिमी व 12.7 मिमी के क्लोज-इन हथियार शामिल हैं। पानी के नीचे के खतरों से निपटने के लिए इसमें पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो भी दिए गए हैं। इसे एक मल्टी-रोल युद्धपोत के रूप में तैयार किया गया है, जो मौजूदा और भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। इसका स्टेल्थ डिजाइन, ऑटोमेशन और सुरक्षा से जुड़ी खूबियां इसे पुराने शिवालिक क्लास फ्रिगेट की तुलना में ज्यादा आधुनिक और प्रभावी बनाती हैं।

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