UN सिक्योरिटी कॉउंसिल सीट के लिए भारत ने लॉन्च किया SHANTI कैंपेन, जानें क्या है विदेश मंत्री जयशंकर का सुपर प्लान

UNSC Seat: UNSC में साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते हुए आधिकारिक तौर पर अपना अभियान शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का सुपर प्लान पेश किया।

अपडेटेड Jul 14, 2026 पर 11:42 AM
UN सिक्योरिटी कॉउंसिल सीट के लिए भारत ने लॉन्च किया SHANTI कैंपेन

UNSC Seat: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते हुए आधिकारिक तौर पर अपना अभियान शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का सुपर प्लान पेश किया। इसे SHANTI कैंपेन का नाम दिया गया है। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के कई राजदूत, राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक इस आधिकारिक कैंपेन को लॉन्च करने के साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ मुलाकात की और पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान सहित कई वैश्विक घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से निकलते समय जब पीटीआई ने उनसे पूछा कि बैठक कैसी रही तो जयशंकर ने संक्षिप्त शब्दों में कहा कि हमेशा की तरह अच्छी।

क्या है भारत का SHANTI कैंपेन?


विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2028-29 कार्यकाल के लिए देश की प्राथमिकताओं को स्पष्ट। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'SHANTI' यानी 'Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity' (नियमों, विश्वास और अखंडता के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना) पर आधारित है। जयशंकर ने भारत के इस सुपर प्लान के तहत सुरक्षा परिषद के लिए अपनी 6 मुख्य प्राथमिकताओं को सामने रखा है।

पहली ग्लोबल साउथ की आवाज बनना। यानी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मंच पर ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की चिंताओं और मुद्दों को मजबूती से उठाना। दूसरी सुधारित बहुपक्षवाद यानी वैश्विक शासन में सुधार को आगे बढ़ाना ताकि इसे अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाया जा सके। तीसरी भविष्य के लिए तैयार पीसकीपिंग, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन को आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल बनाना। चौथी एआई (AI) के दुरुपयोग से निपटना, जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाले खतरों को एड्रेस करना। पांचवीं समुद्री सुरक्षा जिसके तहत वैश्विक समुद्री मार्गों और सुरक्षा को मजबूत करना। छठी टेरर फाइनेंसिंग पर लगाम। इसके तहत आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद का कड़ा विरोध करना और इसे रोकना।

इस अभियान की शुरुआत के अवसर पर एक विशेष वीडियो भी दिखाया गया। इसमें वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका, उसके योगदान और यूएनएससी अभियान की प्राथमिकताओं को दिखाया गया। वीडियो में मिसाइल हमलों से तबाह होते शहरों और प्राकृतिक आपदाओं के फुटेज के बीच भारत द्वारा पहुंचाई गई मानवीय और राहत सहायता को दिखाया गया। वीडियो में कहा गया कि एक अव्यवस्थित दुनिया के लिए, एक सभ्यता ने हमेशा केवल एक ही शब्द में उत्तर दिया है - शांति (Shanti).

इस विशेष वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक आह्वान को भी शामिल किया गया, जो उन्होंने जून 2023 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए किया था कि यह युद्ध का युग नहीं है बल्कि यह संवाद और कूटनीति का युग है। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शासन में बदलाव लाने के लिए सुधार आवश्यक हैं। बहुपक्षवाद को लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिमूलक और प्रभावी होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे देशों का मतभेदों को पाटने और आम सहमति बनाने का एक लंबा इतिहास रहा है। ऐसे देश निश्चित रूप से इस दिशा में अपना उचित योगदान दे सकते हैं।

अगले साल जून में होगा मुकाबला, 9वीं बार सीट की तैयारी

यूएनएससी के 2028-29 कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल यानी जून 2027 में आयोजित किए जाएंगे। इस चुनाव में एशिया-पैसिफिक ग्रुप श्रेणी की इकलौती सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा। भारत इससे पहले आठ बार संयुक्त राष्ट्र के इस शक्तिशाली 15-सदस्यीय निकाय में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में बैठ चुका है। भारत का पिछला कार्यकाल 2021-22 में था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में इस प्रतिष्ठित टेबल पर रह चुका है।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपनी उम्मीदवारी ऐसे समय में पेश कर रहा है जब दुनिया एक गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है। एक तरफ दुनिया के पास मानव कल्याण को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की अभूतपूर्व क्षमताएं हैं तो दूसरी तरफ हम संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता का ऐसा दौर देख रहे हैं जो दूर बैठे लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इस जटिलता से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र को नेतृत्व करना होगा और सुरक्षा परिषद को रास्ता दिखाना होगा इसलिए इस सदस्यता के चुनाव का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात

सप्ताहांत में न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने इस कैंपेन लॉन्च के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी और भारत के यूएन मिशन के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

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