World Bank Report: भारत ने 17 करोड़ लोगों को 'महा गरीबी' से बाहर निकाला, रोजगार में भी सुधार

World Bank Report: भारत ने पिछले दशक में 17 करोड़ लोगों को 'महा गरीबी' से बाहर निकाला है और अब लोअर-मिडल-इनकम देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं, खासकर महिलाओं के लिए, लेकिन बेरोजगारी और अस्थायी नौकरियों जैसी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।

अपडेटेड Apr 26, 2025 पर 8:28 PM
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वर्ल्ड बैंक ने यह भी बताया कि भारत अब लोअर-मिडल-इनकम देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।

 

World Bank Report: भारत ने पिछले दशक में गरीबी उन्मूलन के मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट 'पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' के अनुसार, देश ने 2011-12 से 2022-23 के बीच 171 मिलियन (17.1 करोड़) लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है। इस अवधि में अत्यधिक गरीबी दर 16.2% से घटकर केवल 2.3% रह गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक गरीबी 18.4% से गिरकर 2.8% हो गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह 10.7% से घटकर 1.1% पर आ गई। इससे ग्रामीण और शहरी गरीबी के बीच का फासला भी 7.7 प्रतिशत अंकों से घटकर 1.7 प्रतिशत अंक हो गया, जो कि मजबूत प्रगति का संकेत है।


लोअर-मिडल-इनकम कैटेगरी में भारत की एंट्री

वर्ल्ड बैंक ने यह भी बताया कि भारत अब लोअर-मिडल-इनकम देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। 3.65 डॉलर प्रतिदिन की लोअर-मिडल-इनकम गरीबी रेखा के आधार पर देश में गरीबी दर 61.8% से गिरकर 28.1% हो गई है। इस बदलाव के साथ 378 मिलियन (37.8 करोड़) भारतीय गरीबी से बाहर आए हैं। अब ग्रामीण गरीबी 69% से गिरकर 32.5% और शहरी गरीबी 43.5% से घटकर 17.2% रह गई है।

गरीबी से जंग में पांच राज्यों की बड़ी भूमिका

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ने गरीबी उन्मूलन में बड़ी भूमिका निभाई है। 2011-12 में इन राज्यों में देश के 65% अत्यधिक गरीब रहते थे और 2022-23 तक गरीबी में हुई कुल गिरावट का दो-तिहाई इन्हीं राज्यों से आया। हालांकि, इन राज्यों में अब भी 54% अत्यधिक गरीब और 51% बहुआयामी गरीब (2019-21 के आंकड़े) रहते हैं।

गरीबी के साथ रोजगार में भी हुआ सुधार

भारत रोजगार के मोर्चे पर भी बेहतर कर रहा है। 2021-22 से भारत में जितने लोग काम करने की उम्र (15-64 साल) में आ रहे हैं, उससे भी तेज रफ्तार से नौकरियों के मौके बढ़ रहे हैं। खासकर, महिलाओं के बीच रोजगार दर में तेजी से सुधार हुआ है। शहरी बेरोजगारी 2024-25 की पहली तिमाही में घटकर 6.6% रह गई है, जो 2017-18 के बाद सबसे निचला स्तर है।

इसके साथ ही 2018-19 के बाद पहली बार बड़ी संख्या में पुरुष गांवों से शहरों की तरफ काम की तलाश में जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए खेती-किसानी से जुड़ी नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है।

रोजगार के मोर्चे पर अभी चुनौतियां बाकी

हालांकि, भारत में रोजगार के मोर्चे चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। युवाओं में बेरोजगारी दर 13.3% है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं में बढ़कर 29% तक पहुंच जाती है। खेती-किसानी के अलावा बाकी सेक्टरों (जैसे फैक्ट्री, दुकान, ऑफिस आदि) में जो नौकरियां हैं, उनमें से सिर्फ 23% नौकरियां ही पक्की हैं। बाकी 77% नौकरियां अस्थायी या अनौपचारिक हैं। खेती से जुड़ा जो रोजगार है, वो तो लगभग पूरा का पूरा अस्थायी ही है।

हालांकि अब ग्रामीण इलाकों में और महिलाओं के बीच रोजगार बढ़ रहा है, फिर भी पुरुषों और महिलाओं के बीच काम करने वालों का फासला बहुत ज्यादा है। अभी भी पुरुषों की तुलना में 23.4 करोड़ पुरुष ज्यादा कमाने वाले काम में लगे हैं।

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