India-Nepal News: नेपाल ने भारतीय आमों के आयात पर लगाया बैन? भारत सरकार का आया बयान

India-Nepal Relations: भारत सरकार ने भारतीय आमों के आयात पर नेपाल में रोक लगाए जाने संबंधी कुछ मीडिया रिपोर्ट को तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने कहा कि नेपाल को होने वाला भारतीय आमों का निर्यात बिना किसी बाधा के लगातार जारी है

अपडेटेड Jun 11, 2026 पर 2:24 PM
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India-Nepal Relations: भारत सरकार ने कहा है कि नेपाल ने भारतीय आमों के आयात पर नहीं लगाई है रोक

India-Nepal Relations: केंद्र सरकार ने भारत से आम के आयात पर नेपाल में रोक लगाए जाने संबंधी कुछ मीडिया रिपोर्ट को तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने कहा कि नेपाल को होने वाला भारतीय आमों का निर्यात बिना किसी बाधा के लगातार जारी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि नेपाल के प्लांट क्वारंटाइन और पेस्टिसाइड मैनेजमेंट सेंटर ने खुद ही 10 जून को यह स्पष्ट किया कि भारतीय आमों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि नेपाल ने भारतीय आम के आयात पर रोक लगा दी है, जो कि पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।" इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा, "मौजूदा नियमों के तहत पौधों के स्वास्थ्य संबंधी शर्तों का पालन करने पर आयात की अनुमति जारी है। इन शर्तों के अनुपालन पर आयात की अनुमति और रिलीज ऑर्डर जारी किए जा रहे हैं।"

भारत ने नेपाल को 2,005 टन आम निर्यात किया


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक भारत ने नेपाल को 2,005 टन आम की 149 खेपों का निर्यात किया है। जबकि जून में अब तक 266 टन आम की 18 खेपें भेजी जा चुकी हैं। नेपाल ने हाल ही में अपने कुछ आयात नियमों में संशोधन किया है। इस पर भारत ने कहा कि वह नए मानकों के अनुरूप आम के निर्यात को सुगम बना रहा है। हालांकि, भारत ने इस बात पर नेपाल से चिंता जाहिर की है कि पूर्व-परामर्श के बगैर ही नए पौध स्वास्थ्य उपायों को लागू कर दिया गया।

भारत ने कहा कि इस मुद्दे को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सैनिटरी और फाइटो-सैनिटरी (SPS) समझौते और इंटरनेशनल प्लांट प्रोटेक्शन कन्वेंशन (IPPC) के ढांचे के तहत द्विपक्षीय माध्यमों से उठाया जा रहा है। मंत्रालय ने व्यापारियों और हितधारकों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और आम निर्यात पर किसी भी तरह की प्रतिबंध संबंधी अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें।

यूपी के किसानों ने जताई थी चिंता

उत्तर प्रदेश के आम उत्पादक क्षेत्र मलीहाबाद में किसानों ने भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के नेपाल के निर्णय पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आम की छवि प्रभावित हो सकती है। हालांकि, यूपी के विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस प्रतिबंध का किसानों की आय पर मामूली असर होगा। मंत्री ने हालांकि उम्मीद जताई कि नेपाल अपने निर्णय पर पुनर्विचार करेगा।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नेपाल ने अत्यधिक कीटनाशक और अपर्याप्त क्वरंटाइन सुविधाओं का हवाला देते हुए हाल ही में भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी थी। लखनऊ के पास मलीहाबाद को भारत के सर्वोत्तम आम उत्पादक क्षेत्रों में से एक के रूप में जाना जाता है। यह क्षेत्र दशहरी आम की किस्म के लिए प्रसिद्ध है जिसे विदेशी बाजारों को निर्यात किया जाता है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि यह निर्णय ऐसे समय में किया गया है जब किसान पहले ही अपने उत्पादों का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसान कलीम अहमद ने कहा कि इस प्रतिबंध का घरेलू बाजार पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, "जब भी आमों का निर्यात किया जाता है, किसान और सरकार दोनों लाभान्वित होते हैं। इस तरह के निर्णयों से किसानों के समक्ष दिक्कतें बढ़ जाती हैं।"

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एक अन्य किसान मोहम्मद इकरार ने कहा कि इस निर्णय से विदेश में भारतीय आमों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। “हम अपने आम के बागानों की हमारे बच्चों की तरह देखभाल करते हैं, इसके बावजूद किसानों को उनकी मेहनत का सही पारिश्रमिक नहीं मिलता। निर्यात में किसी तरह की बाधा चिंता का कारण बन जाती है।” मंत्री ने कहा कि नेपाल एक संप्रभु राष्ट्र है और दो देशों के बीच व्यापार संबंधी मुद्दे केंद्र द्वारा देखे जाते हैं।

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