Russian Oil: रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार (18 फरवरी) को कहा कि उसके पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने रूस से तेल खरीदने पर अपना रुख बदल लिया है। मॉस्को ने कहा कि भारत का रूस से तेल खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। साथ ही यह खरीदारी वैश्विक हाइड्रोकार्बन बाजार में स्थिरता बनाए रखता है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो के दावों में कुछ भी नया नहीं है।
ये टिप्पणियां अमेरिका के इस दावे की पृष्ठभूमि में आईं हैं जिसमें उसने कहा है कि भारत रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करने पर सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगातार दावा किया जा रहा है कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने की सहमति जताई है। हालांकि, रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, "हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने रूस से हाइड्रोकार्बन खरीदने के मुद्दे पर अपना रुख बदला है। भारत द्वारा रूस से हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में सहायक है।"
जाखारोवा ने आगे कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दावों में कुछ भी नया नहीं है।" हाला ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत हुई थी। इसके बाद ट्रंप ने अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ को 50 परसेंट से घटाकर 18 परसेंट करने की घोषणा की।
इस कटौती में 25 फीसदी टैरिफ हटाना भी शामिल था, जो ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली के रूसी तेल खरीदने पर भारत पर लगाया था। फरवरी की शुरुआत में नई दिल्ली के साथ ट्रेड डील की घोषणा करते हुए ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने अभी तक वाशिंगटन के दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।
पिछले हफ्ते, रुबियो ने यह भी कहा कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने का वादा किया है। हालांकि, भारत ने पहले कहा था कि भारत की एनर्जी खरीद के पीछे राष्ट्रीय हित ही 'गाइडिंग फैक्टर' होंगे। इससे पहले भी रूस ने अमेरिका पर भारत और दूसरे देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। रूस ने कहा था कि वॉशिंगटन टैरिफ, बैन और सीधे रोक जैसे कई तरह के जबरदस्ती वाले तरीके अपना रहा है।