Diesel Exports Jump: मिडिल ईस्ट में जारी ईरान युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार के समीकरण बदल दिए है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन के बीच बढ़ते मार्जिन का फायदा उठाने के लिए भारतीय रिफाइनरीज ने मार्च के महीने में डीजल निर्यात में 20% की भारी बढ़ोतरी की है। इससे रिफाइनरियों के मुनाफे में बड़ा उछाल देखने को मिला है।
शिपिंग डेटा के मुताबिक, मार्च के महीने में डीजल का विदेशी बाजार में प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। 1 से 28 मार्च के दौरान डीजल का निर्यात बढ़कर 12.9 मिलियन बैरल पहुंच गया, जो फरवरी में 10.74 मिलियन बैरल था। दिलचस्प बात यह है कि जहां डीजल का एक्सपोर्ट बढ़ा है, वहीं पेट्रोलियम उत्पादों के कुल निर्यात में करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई है।
क्यों बढ़ा डीजल का मुनाफा?
ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जारी तनाव ने डीजल और जेट फ्यूल जैसी मध्यम डिस्टिलेट्स की सप्लाई कम कर दी है। कच्चे तेल की कीमत और डीजल-पेट्रोल जैसे रिफाइंड उत्पादों की कीमत के बीच के अंतर को 'क्रैक स्प्रेड' कहते हैं। युद्ध के कारण डीजल और जेट फ्यूल का क्रैक स्प्रेड के दाम अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए है। जहां पेट्रोल का मार्जिन स्थिर बना हुआ है, वहीं डीजल और जेट फ्यूल बेचना रिफाइनरीज के लिए कहीं ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है।
भारतीय रिफाइनरीज की नई रणनीति
बदलते वैश्विक हालातों को देखते हुए भारतीय तेल कंपनियों ने अपना उत्पादन और निर्यात का तरीका बदल लिया है। कंपनियां अब उन उत्पादों को प्राथमिकता दे रही हैं जिनसे ज्यादा रिटर्न मिल रहा है। यही कारण है कि कुल एक्सपोर्ट घटने के बावजूद डीजल एक्सपोर्ट बढ़ रहा है। मिडिल ईस्ट में सप्लाई चेन बाधित होने से यूरोप और एशिया के अन्य देशों में डीजल की कमी हुई है, जिसे भारतीय रिफाइनरीज अपनी सप्लाई से पूरा कर रही हैं।