अमेरिकी थाली में अब मिलेगा 'मेड इन इंडिया' का स्वाद, ट्रेड डील से $206 अरब के विशाल बाजार में भारत पेश करेगा बड़ी दावेदारी

India-US Trade Deal: इस डील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भारत के मसाले, चाय, कॉफी, फल और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पाद अब अमेरिका में 'जीरो ड्यूटी' पर बिकेंगे। वहीं, समुद्री उत्पाद और बासमती चावल जैसे अन्य सामानों के लिए भी अमेरिका ने अपने टैरिफ घटाकर 18% कर दिए हैं। यह समझौता भारत के लिए 'गेम-चेंजर' साबित होने वाला है

अपडेटेड Feb 10, 2026 पर 3:36 PM
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दोनों देशों के बीच हुए ट्रेड डील को लागू करने की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए तरक्की के नए द्वार खोल दिए हैं। वाणिज्य मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब अमेरिका के कुल $206 अरब यानी करीब ₹17 लाख करोड़ के कृषि और खाद्य बाजार में सीधी सेंध लगाने को तैयार है।

इस डील की सबसे बड़ी खूबी यह है कि भारत के मसाले, चाय, कॉफी, फल और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पाद अब अमेरिका में 'जीरो ड्यूटी' पर बिकेंगे। वहीं, समुद्री उत्पाद और बासमती चावल जैसे अन्य सामानों के लिए भी अमेरिका ने अपने टैरिफ घटाकर 18% कर दिए हैं। कुल मिलाकर यह समझौता भारत के ग्रामीण विकास और निर्यात अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम-चेंजर' साबित होने वाला है।

मसालों से लेकर झींगा मछली तक, किसे मिलेगा कितना फायदा?


इस समझौते के तहत भारत को दो स्तरों पर फायदा मिलने जा रहा है। पहला, $46 अरब का वह बाजार जहां भारतीय उत्पादों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसमें मसाले ताजे फल (आम और केले), और औषधीय तेल शामिल है। दूसरा बड़ा हिस्सा $160 अरब का है, जहां भारत के समुद्री उत्पाद (जैसे झींगा मछली/Shrimp) और स्पेशलिटी राइस को भारी छूट मिलेगी। वर्तमान में अमेरिका के $25 अरब के समुद्री उत्पाद बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने की अपार संभावनाएं है। गौरतलब है कि 2024 में भारत पहले से ही अमेरिका के साथ कृषि व्यापार में $1.3 अरब के फायदे में रहा है, जो इस नई डील के बाद और तेजी से बढ़ेगा।

कब और कैसे लागू होगी डील?

दोनों देशों के बीच हुए ट्रेड डील को लागू करने की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। 18% कम टैरिफ की सुविधा इसी हफ्ते अमेरिकी कार्यकारी आदेश के जरिए शुरू होने की उम्मीद है, जबकि जीरो-ड्यूटी की रियायतें मार्च के आसपास अंतरिम व्यापार समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने के बाद प्रभावी होंगी। जानकारों का मानना है कि इससे न केवल भारत का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश में विदेशी मुद्रा का भंडार भी मजबूत होगा। यह समझौता उन आलोचकों को भी करारा जवाब है जो कह रहे थे कि भारत ने अमेरिका के सामने घुटने टेके हैं। सच तो यह है कि भारत ने अपने किसानों के हितों को बचाते हुए अमेरिकी बाजार का सबसे मलाईदार हिस्सा अपने नाम कर लिया है।

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