India Buy Russian oil: मिडिल ईस्ट में जारी भयंकर युद्ध और सप्लाई चेन टूटने के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका से विशेष छूट मिलते ही भारतीय रिफाइनरों ने रिकॉर्ड 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदने का सौदा किया है। पिछले कुछ समय से अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी, लेकिन मिडिल ईस्ट के ताजा हालात ने समीकरण बदल दिए हैं।
ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद 'होर्मुज जलडमरूमध्य' बंद हो गया है। इससे सऊदी अरब और इराक जैसे देशों से भारत आने वाली तेल की सप्लाई ठप हो गई है। भारत की जरूरतों को देखते हुए अमेरिका ने पिछले हफ्ते के अंत में एक विशेष छूट दी। इसके तहत 5 मार्च से पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी तेल को भारतीय कंपनियां खरीद सकती हैं। छूट मिलते ही इंडियन ऑयल और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने स्पॉट मार्केट में उपलब्ध रूस के लगभग सभी अनसोल्ड कार्गो खरीद लिए हैं।
किन कंपनियों ने कितना खरीदा?
बाजार के जानकारों और ट्रेडर्स के मुताबिक, रूस के विभिन्न ग्रेड जैसे- Urals, ESPO और Varandey के तेल के लिए होड़ मची है। सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल ने करीब 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी कम से कम इतनी ही मात्रा में सौदा किया है। अमेरिकी छूट का असर यह हुआ कि जो रूसी टैंकर जैसे- 'Maylo' और 'Sarah' पहले सिंगापुर की ओर जा रहे थे, उन्होंने अपना रास्ता बदलकर भारत की ओर रुख कर लिया है।
कीमतों में दिखा बड़ा बदलाव
मिडिल ईस्ट संकट ने रूसी तेल की कीमतों की गणित भी बदल दी है। यूक्रेन युद्ध के समय जो रूसी तेल भारी छूट पर मिलता था, वह अब $2 से $8 प्रति बैरल के प्रीमियम पर मिल रहा है। यह कीमतें लंदन के 'डेटेड ब्रेंट' बेंचमार्क के आधार पर तय की गई हैं।
आंकड़ों में समझें तेल का खेल
भारत और रूस के तेल व्यापार में पिछले कुछ महीनों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। 2024 के मध्य में भारत रूस से रोजाना 20 लाख बैरल तेल ले रहा था, जो फरवरी 2026 में घटकर औसतन 10.6 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था। दरअसल अमेरिका ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर रखा है, जिससे लेनदेन में मुश्किलें आ रही थीं। हालांकि, मौजूदा संकट ने वाशिंगटन को भारत के लिए नियमों में ढील देने पर मजबूर कर दिया है।
ऊर्जा सुरक्षा पहली प्राथमिकता
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत के लिए इराक और सऊदी अरब से तेल मंगाना नामुमकिन जैसा हो गया है। ऐसे में रूस से की गई यह बड़ी खरीदारी न केवल घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के पहिये को भी चालू रखेगी।