India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से वाइन, लग्जरी बाइक्स और दवाइयां होंगी सस्ती; भारतीय कृषि क्षेत्र को मिला सुरक्षा कवच!

India-US Trade Deal: ट्रेड डील के तहत 800cc से 1600cc की क्षमता वाली हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलें अब भारत में ड्यूटी-फ्री प्रवेश कर सकेंगी। इसके अलावा, 3000cc से अधिक क्षमता वाली अमेरिकी पेट्रोल कारों पर आयात शुल्क घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, घरेलू ईवी उद्योग को सुरक्षित रखने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को फिलहाल इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है

अपडेटेड Feb 08, 2026 पर 8:04 AM
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भारत ने दूध, पनीर, मक्खन जैसे डेयरी उत्पादों और गेहूं, चावल, मक्का व सोयाबीन जैसे संवेदनशील अनाज को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी सामानों पर आयात शुल्क कम करने या पूरी तरह हटाने पर सहमति जताई है। 7 फरवरी को फाइनल हुए इस समझौते के तहत अमेरिकी वाइन, प्रीमियम मोटरसाइकिल, मेडिकल डिवाइस और कई कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में बड़ी राहत मिलेगी। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह डील भारतीय उद्योगों की जरूरतों और घरेलू किसानों के हितों के बीच संतुलन बिठाकर तैयार की गई है। इस समझौते पर मार्च के मध्य तक औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिसके बाद नई दरें प्रभावी हो जाएंगी।

हार्ले डेविडसन और लग्जरी कारों पर जीरो टैरिफ का रास्ता साफ!

शौकीनों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि 800cc से 1600cc की क्षमता वाली हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलें अब भारत में ड्यूटी-फ्री प्रवेश कर सकेंगी। इसके अलावा, 3000cc से अधिक क्षमता वाली अमेरिकी पेट्रोल कारों पर आयात शुल्क घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, घरेलू ईवी उद्योग को सुरक्षित रखने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को फिलहाल इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है। वाइन और स्पिरिट्स के मामले में भी शुल्क कटौती की गई है, लेकिन घरेलू उद्योगों को डंपिंग से बचाने के लिए एक 'न्यूनतम आयात मूल्य' (MIP) की शर्त रखी गई है।


सस्ती होंगी कैंसर की दवाएं और हार्ट पेसमेकर

स्वास्थ्य क्षेत्र में इस समझौते का बड़ा लाभ मरीजों को मिलेगा। कैंसर, न्यूरोलॉजिकल और हृदय रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई महत्वपूर्ण अमेरिकी दवाओं पर टैरिफ कम किया गया है। साथ ही पेसमेकर, एक्स-रे पार्ट्स और डायग्नोस्टिक उपकरणों जैसे मेडिकल डिवाइसेज पर भी ड्यूटी घटाई गई है। इसके अलावा, भारतीय कपड़ा उद्योग को मजबूती देने के लिए 'एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल कॉटन' के आयात पर भी रियायत दी गई है, जिसका उत्पादन भारत में बहुत कम होता है। पोल्ट्री सेक्टर की जरूरतों को देखते हुए पशु आहार के लिए उपयोग होने वाले 'DDGs' (इथेनॉल का उप-उत्पाद) पर भी सीमित रियायत दी गई है।

बादाम-अखरोट पर राहत, डेयरी और अनाज पर 'नो एंट्री'

अमेरिकी पिस्ता, अखरोट और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स पर शुल्क में कटौती की गई है, जिससे इनके दाम कम हो सकते हैं। सेब के मामले में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए कोटा सिस्टम लागू किया गया है, जिसके तहत एक निश्चित मात्रा तक ही 25% शुल्क लगेगा और न्यूनतम मूल्य को ₹50 से बढ़ाकर ₹80 प्रति किलो कर दिया गया है। गौरतलब है कि भारत ने दूध, पनीर, मक्खन जैसे डेयरी उत्पादों और गेहूं, चावल, मक्का व सोयाबीन जैसे संवेदनशील अनाज को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है। साथ ही जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों पर भी कोई रियायत नहीं दी गई है।

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