भारतीय वायु सेना (IAF) ने इस महीने की शुरुआत में एक हादसे में अपना एक और तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) खो दिया है। हादसा उस समय हुआ जब विमान एक रूटीन ट्रेनिंग उड़ान के बाद लैंडिंग की तैयारी कर रहा था। इस घटना के बाद पूरे तेजस फ्लीट की जांच और बड़े स्तर पर तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल भारतीय वायु सेना ने इस ताजा दुर्घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल एयर बेस पर हुआ। फाइटर जेट नियमित प्रशिक्षण उड़ान पूरी करने के बाद लैंडिंग कर रहा था, तभी दुर्घटना हो गई। शुरुआती जानकारी के मुकाबिक, विमान में किसी तकनीकी खराबी की आशंका है। माना जा रहा है कि ऑनबोर्ड सिस्टम में गड़बड़ी इसकी वजह हो सकती है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और तकनीकी टीम सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
दुर्घटना में विमान के एयरफ्रेम को नुकसान पहुंचा है और संभावना है कि इसे पूरी तरह से सर्विस से बाहर करना पड़े। हालांकि, पायलट समय रहते सुरक्षित रूप से इजेक्ट हो गया और उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई। भारतीय वायु सेना में शामिल होने के बाद यह तीसरा तेजस विमान है जो हादसे का शिकार हुआ है। इससे पहले मार्च 2024 में जैसलमेर के पास एक तेजस जेट दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इस घटना में भी पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहा था। फिलहाल हालिया हादसे की विस्तृत जांच की जा रही है।
दूसरी दुर्घटना नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान हुई थी। एरोबैटिक प्रदर्शन के समय तेजस विमान संयुक्त अरब अमीरात में क्रैश हो गया। इस हादसे में पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल की मौत हो गई, क्योंकि वे समय पर इजेक्ट नहीं कर सके। विमान जमीन पर गिरने से पहले उसमें आग लग गई थी। इस दुर्घटना की जांच अभी भी जारी है। दुबई हादसे के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने विमान और पायलट के नुकसान पर गहरा दुख जताया था।
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब तेजस Mk1A कार्यक्रम पहले से ही देरी का सामना कर रहा है। भारतीय वायु सेना ने 180 Mk1A फाइटर जेट का ऑर्डर दिया है, लेकिन उनकी डिलीवरी लगभग दो साल पीछे चल रही है।