सीजफायर के बाद होर्मुज से निकला पहला जहाज भारतीय, 62000 टन LNG लेकर आ रही 'दिशा'

रिपोर्ट के अनुसार, टैंकर ने पूरी यात्रा के दौरान अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) चालू रखा। इस सिस्टम की मदद से जहाज की लोकेशन, यात्रा मार्ग और गंतव्य की जानकारी लगातार मिलती रही। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि AIS के संकेतों से जहाज का संबंध भारत सरकार से जुड़ा हुआ बताया गया। बढ़ा।

अपडेटेड Jun 15, 2026 पर 7:47 PM
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर पूरी तरह सहमति बन गई है

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर पूरी तरह सहमति बन गई है, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को खोलने और नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने का ऐतिहासिक ऐलान किया है।

वहीं अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान के बाद सोमवार को एक भारतीय एलएनजी टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरा। माना जा रहा है कि यह सीजफार के ऐलान के बाद इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाला पहला बड़ा कॉमर्शियल शिप है। ‘दिशा’ नाम का यह टैंकर फिलहाल गुजरात के दहेज बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। इसके 18 जून को वहां पहुंचने की उम्मीद है।

खास बात यह है कि जहाज ने यह यात्रा ऐसे समय में पूरी की, जब इस समुद्री मार्ग को आधिकारिक तौर पर दोबारा खोले जाने की घोषणा भी नहीं हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इस सप्ताह के अंत तक इस मार्ग को फिर से खोला जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, टैंकर ने पूरी यात्रा के दौरान अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) चालू रखा। इस सिस्टम की मदद से जहाज की लोकेशन, यात्रा मार्ग और गंतव्य की जानकारी लगातार मिलती रही। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि AIS के संकेतों से जहाज का संबंध भारत सरकार से जुड़ा हुआ बताया गया। कतर से गैस का कार्गो लेकर आ रहा यह टैंकर लराक द्वीप के पास से गुजरते हुए ईरानी समुद्री मार्ग के जरिए आगे बढ़ा।


 62000 टन LNG लेकर आ रही 'दिशा'

सबसे खास बात यह रही कि ‘दिशा’ टैंकर ने उसी सामान्य व्यावसायिक समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया, जिसका उपयोग क्षेत्र में तनाव बढ़ने और समुद्री यातायात प्रभावित होने से पहले किया जाता था। जहाज ने संघर्ष के दौरान ईरान और अमेरिका द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक मार्गों का सहारा नहीं लिया। कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि इस कदम को ईरानी अधिकारियों की अप्रत्यक्ष सहमति के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। यह टैंकर करीब 277 मीटर लंबा और 44 मीटर चौड़ा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अपनी यात्रा दोबारा शुरू करने से पहले यह जहाज तीन महीने से अधिक समय तक फारस की खाड़ी में रुका हुआ था। अब हालात सामान्य होने के बाद इसने अपनी यात्रा फिर से शुरू कर दी है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार सुबह (स्थानीय समय के अनुसार) घोषणा की कि ईरान के साथ बातचीत सफल रही है और दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “सभी को बधाई। मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने की अनुमति देता हूं। साथ ही, अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकेबंदी को तुरंत हटाने का आदेश भी देता हूं। दुनिया भर के जहाज अब अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं। तेल की आपूर्ति फिर से सामान्य होने दें।” ट्रंप के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकती है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार को राहत मिलने की उम्मीद है।

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