1985 में भारत से गोद लिया बच्चा नीदरलैंड के हीमस्टेड में मेयर बनता है और अपनी जैविक मां को तलाशने भारत लौटता है। बॉलीवुड की फिल्मों से मेल खाती ये घटना कोई कहानी नहीं, किसी के जीवन की आपबीती है। ये बच्चा कोई और नहीं नीदरलैंड के हीमस्टेड के मौजूदा मेयर फाल्गुन बिनेनडिज्क हैं, जो पिछले कई वर्षों से अपनी बायोलॉजिकल मां की तलाश करने भारत आ रहे हैं। हाल ही में एक बार फिर वो उन्हें खोजने की जारी रखने के लिए नागपुर लौटे हैं। उन्हें मात्र तीन दिन की उम्र में एक अविवाहित महिला ने नागपुर में महिलाओं के शेल्टर होम मातृ सेवा संघ में छोड़ दिया गया था।
उस बच्चे को एक डच दंपति ने गोद लिया और अपने साथ नीदरलैंड ले गया। उन्होंने बच्चे का पालन-पोषण बहुत अच्छे से किया और बड़ा होकर वो नीदरलैंड के हीमस्टेड का मेयर बना। सब कुछ अच्छा था, शिक्षा, परिवार, प्यार, सम्मान। इसके बावजूद मन में एक टीस थी, अपनी जन्म देने वाली मां को जानने की। ये जिज्ञासा ही उन्हें बार-बार भारत लाती रही और अंतत: सात साल पहले उन्होंने अपनी जैविक मां को विधिवत तरीके से खोजने का फैसला किया।
फाल्गुन का जन्म 10 फरवरी, 1985 को हुआ था। उनकी मां एक 21 साल की अविवाहित महिला थी। द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे को 13 फरवरी, 1985 को तीन दिन की आयु में शेल्टर में रखा गया था और कानूनी रूप से गोद लिए जाने से पहले वह लगभग एक महीने तक वहीं रहा। शेल्टर होम के रिकॉर्ड के अनुसार, फाल्गुन को बाद में भारत घूमने आए नीदरलैंड्स के एक जोड़े ने गोद ले लिया और अपने देश ले जाकर उनकी परवरिश की। शेल्टर की एक नर्स ने हिंदू कैलेंडर में उनके जन्म के महीने के नाम पर उनका नाम 'फाल्गुन' रखा था।
फाल्गुन ने कहा है कि उन्हें हमेशा पता था कि उन्हें गोद लिया गया है। उनकी पहली भारत यात्रा 2006 में हुई थी, जब उन्होंने एक टूरिस्ट के तौर पर पूरे देश की यात्रा की थी। भारत यात्रा में उन्हें घर जैसा महसूस हुआ। इस अनुभव ने उनके मूल के बारे में सवाल खड़े किए। 2017 में, फाल्गुन अपनी जैविक मां को ढूंढने के खास मकसद से नागपुर लौटे। उस समय, मातृ सेवा संघ के कर्मचारियों से उन्हें जन्मतिथि और उनकी मां का नाम जैसी सीमित जानकारी मिली।
अब विवाहित फाल्गुन के चार बच्चे हैं वह एम्स्टर्डम के पास स्थित हीमस्टेड के मेयर हैं। अगस्त 2024 में, फाल्गुन अपने मूल का पता लगाने की कोशिशों को फिर से शुरू करने के लिए फिर से नागपुर आए। उन्होंने नगर आयुक्त अभिजीत चौधरी और जिला कलेक्टर विपिन इटनकर से मुलाकात की और रिकॉर्ड उपलब्ध कराए। लेकिन बड़ी सफलता उन्हें दिसंबर 2025 में मिली, जब जिला प्रशासन के अधिकारियों ने एक रिटायर्ड नर्स का पता लगाया, जो उस समय मातृ सेवा संघ में काम करती थी।