क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज का मानना है कि इंडिगो को मौजूदा क्राइसिस की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। उसने कंपनी के रेवेन्यू में लॉस की आशंका जताई है। कंपनी को रिफंड के रूप में कस्टमर्स को करोड़ों रुपये लौटाने पड़े हैं। रेगुलेटर कंपनी पर पेनाल्टी भी लगा सकता है। इस पूरी क्राइसिस की वजह डीजीसीए के एफडीटीएल से जुड़े नियम हैं, जिसकी जानकारी एक साल पहले मिल जाने के बावजूद कंपनी पालन करने में नाकाम रही। इस क्राइसिस का असर इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों पर भी पड़ रहा है।
इंडिगो को हो सकता है बड़ा लॉस
Moody's ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फ्लाइट्स कैंसिलेशन, रिफंड्स और पैसेंजर्स को हुई दिक्कतों की वजह से InterGlobe Aviation को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उसका मानना है कि DGCA कंपनी पर पेनाल्टी भी लगा सकता है। डीजीसीए सिविल एविएशन का रेगुलेटर है। इंडिगो की हवाई सेवाओं में यह बाधा तब आई है, जब विंटर सीजन पीक पर है।
2 दिसंबर से फ्लाइट्स कैंसिल होने लगे
इंडिगो को 5 दिसंबर को 1,600 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल करने पर मजबूर होना पड़ा। नवंबर में 1,200 फ्लाइट्स उड़ान नहीं भर सकी थीं। लेकिन, फ्लाइट्स कैंसिल होने की शुरुआत 2 दिसंबर को हुई। 7 दिसंबर को कंपनी को 500 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल करने पड़े। मूडीज ने अपन रिपोर्ट में कहा है कि इंडिगो की हवाई सेवाएं अब तक सामान्य नहीं हो पाई हैं।
प्लानिंग के लेवल पर बड़ी लापरवाही
मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिगो में प्लानिंग के लेवल पर बड़ी लापरवाही हुई है। फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के दूसरे चरण के नियम 1 नवंबर, 2025 से लागू हो गए। इसके बारे में कंपनी को एक साल से ज्यादा समय पहले बता दिया दिया गया था। इस नियम में यह कहा गया है कि आधी रात से लेकर 6 बजे सुबह तक की ड्यूटी को मिडनाइट ड्यूटी माना जाएगा। 24 घंटों में 6 की जगह अब सिर्फ 2 या 3 लैंडिंग की इजाजत दी गई है। इसका मकसद सेफ्टी में इम्प्रूवमेंट और पाटलट्स/क्रू में थकान की समस्या को दूर करना है।
नियमों का पालन करने में चूक गई कंपनी
रेटिंग एजेंसी का कहना है कि अपने कमजोर ऑपरेटिंग मॉडल की वजह से इंडिगो नए नियमों के हिसाब से अपने ऑपरेशन में बदलाव नहीं कर सकी। इस वजह से उसे बड़ी संख्या में फ्लाइट्स कैंसिल करने को मजबूर होना पड़ा। कई फ्लाइट्स में काफी देर हुई । इससे पैसेंजर्स को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। इस बीच डीजीसीए ने कंपनी के सीईओ Pieter Elbers और सीईओ Isidro Porqueras को शो कॉज नोटिस इश्यू किए हैं।
1 दिसंबर से अब तक 15 फीसदी से ज्यादा गिरा शेयर
इस क्राइसिस का असर इंडिगो के शेयरों पर पड़ा रहा है। 8 दिसंबर को कंपनी का शेयर 8.62 फीसदी क्रैश कर गया। 1 दिसंबर के बाद से कंपनी के शेयर 15 फीसदी से ज्यादा टूट चुके हैं। 1 दिसंबर को कंपनी का शेयर 5,794 रुपये पर बंद हुआ था। 8 दिसंबर को यह 5000 रुपये के लेवल से नीचे बंद हुआ।