Get App

Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौते पर भारत का सबसे बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र, 15 पॉइंट में समझिए पाकिस्तान क्यों मुंह की ही खाएगा

Indus Waters Treaty India Pakistan Conflict: 1951 में टेनेसी वैली अथॉरिटी के पूर्व अध्यक्ष डेविड लिलिएंटथल ने वर्ल्ड बैंक की मदद से दोनों देशों को संयुक्त रूप से सिंधु बेसिन विकसित करने का प्रस्ताव दिया। वर्ल्ड बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष यूजीन ब्लैक ने 6 सितंबर 1951 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर इसका प्रस्ताव दिया। इसे दोनों ने स्वीकार किया

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jul 08, 2026 पर 1:18 PM
Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौते पर भारत का सबसे बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र, 15 पॉइंट में समझिए पाकिस्तान क्यों मुंह की ही खाएगा
अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के साथ ही सिंधु जल विवाद भी पैदा हो गया

Indus Waters Treaty Legal points: भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1960 से चले आ रहे सिंधु जल समझौते को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच कानूनी मोर्चे पर भारत का पक्ष मजबूत है। इसे लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) के पूर्व अतिरिक्त सचिव और कानूनी सलाहकार डॉ. विष्णु दत्त शर्मा ने एक डिटेल्ड लीगल एनालिसिस किया है।

पीटीआई पर मौजूद इस एनालिसिस से साफ है कि अगर पाकिस्तान इस समझौते के नियमों का उल्लंघन कर एकतरफा कोई कदम उठाता है तो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत के पास उसे करारा जवाब देने का एक बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र मौजूद है। यहां नीचे 15 पॉइंट में समझिए कि इस समझौते का कानूनी ढांचा क्या है और पाकिस्तान इसमें कैसे मुंह की खाएगा-

1- सिंधु नदी प्रणाली का विशाल दायरा

सिंधु नदी लगभग 1800 मील लंबी है। इसकी पश्चिमी सहायक नदियां (काबुल, कुर्रम) 700 मील से अधिक लंबी हैं जबकि पूर्वी सहायक नदियां (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) कुल मिलाकर 2800 मील से अधिक लंबी हैं। यह पूरा सिस्टम 450000 वर्ग मील क्षेत्र को कवर करता है। ये इसे दुनिया की सबसे बड़े नदी प्रणालियों में से एक बनाता है। इसका अधिकांश हिस्सा भारत और पाकिस्तान में स्थित है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें