मध्य प्रदेश सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट में अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में बड़ा दावा किया। सरकार ने कोर्ट को बताया कि ट्विशा के शरीर पर मिले चोट के निशान मौत से पहले के थे और यह चोटें उसकी मौत से पहले किसी “हाथापाई या संघर्ष” के दौरान लगी हो सकती हैं।
यह सुनवाई पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर हो रही थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि ट्विशा को दहेज को लेकर ताने दिए जाते थे। उससे कहा जाता था कि शादी में उसके परिवार ने जो खर्च किया, वह “काफी नहीं” था।
सरकार की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि ट्विशा के हाथ, कोहनी और सिर पर चोट के निशान मिले थे। जब कोर्ट ने पूछा कि क्या ये चोटें मौत से पहले की हैं, तो सरकार ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इन्हें एंटी-मॉर्टम यानी मौत से पहले की चोट बताया गया है।
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि ये चोटें मौत के बाद या शव नीचे उतारते समय नहीं लगी थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस संभावना को खारिज कर दिया गया है। सरकार के मुताबिक, रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि ट्विशा की मौत से पहले किसी तरह की झड़प या संघर्ष हुआ था।
सरकार ने कोर्ट में यह भी आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह दोनों ने ट्विशा के साथ क्रूरता की। जांच में मिले चैट्स का हवाला देते हुए कहा गया कि ट्विशा की प्रेग्नेंसी के बाद परिवार में विवाद बढ़ गए थे और उसके खिलाफ लगातार “गंभीर टिप्पणियां” की जाती थीं।
जब कोर्ट ने पूछा कि आरोप सिर्फ पति पर हैं या सास पर भी, तो सरकार ने साफ कहा कि “दोनों ने ट्विशा के साथ क्रूरता की।”
मध्य प्रदेश सरकार ने यह आरोप भी लगाया कि गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। सरकार के अनुसार, पुलिस ने 13 और 14 मई को उन्हें नोटिस भेजे थे, लेकिन जब पुलिस उनके घर पहुंची तो वह वहां नहीं मिलीं।
सरकार ने कोर्ट में कहा कि गिरिबाला सिंह जांच में शामिल नहीं हो रहीं, लेकिन अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए समय निकाल रही हैं। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और इस केस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।