ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले का आज एक महीने का वक्त पूरा हो चुका है। वहीं बीते एक महीने से जारी इस जंग का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। भारत समेत पूरी दुनिया में क्रूड ऑयल और एलपीजी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं ईरान जंग के बीच भारत को एक और बड़ी खुशखबरी मिली है। जिस होर्मुज में पूरी दुनिया के जहाज फंसे हैं, वहां से भारत आसानी से अपने जहाज बारी-बारी से निकाल रहा है। शनिवार को भारत की ओर जा रहे दो और एलपीजी टैंकरों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार कर लिया।
ईरान ने भारत के तेल और एलपीजी लदे जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने की इजाजत दे दी है। शनिवार को भारत की ओर जा रहे दो और एलपीजी टैंकरों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब ईरान ने कहा है कि चल रहे तनाव के बीच भारत समेत चार “मित्र देशों” को इस रास्ते से अपने जहाज ले जाने की अनुमति दी जाएगी। शिपिंग से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुसार, BW ELM और BW TYR नाम के ये टैंकर उस “हाई-रिस्क कॉरिडोर” से गुजरे हैं, जो संघर्ष शुरू होने के बाद से लगभग बंद पड़ा था। अब ये दोनों जहाज़ आगे बढ़ते हुए ओमान की खाड़ी की तरफ जा रहे हैं।
भारत का झंडा लगे ये दोनों टैंकर, एक-दूसरे के काफी करीब चलते हुए होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बाहर निकले। इन दोनों टैंकर में 90,000 टन से ज्यादा एलपीजी भरी हुई है। इसके अलावा करीब पांच और भारतीय टैंकर—जिनमें ज्यादातर कच्चा तेल भरा है—अभी भी संयुक्त अरब अमीरात के पास समुद्री क्षेत्र में खड़े हैं और जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि, यह वही अहम रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल का करीब पांचवां हिस्सा होकर गुजरता है, इसलिए यहां की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कुल मिलाकर खाड़ी क्षेत्र में भारत का झंडा लगे करीब 20 जहाज फंसे हुए हैं। इसके अलावा, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस इलाके में मौजूद अपने खाली जहाज़ों में एलपीजी भी भर रहा है।
यह स्थिति अब्बास अराघची के बयान के एक दिन बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का रुख साफ किया था। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है। अराघची ने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा कि पाँच “मित्र देशों”—चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान—के टैंकरों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि ईरान के विरोधी देशों से जुड़े जहाज़ों को अब भी नाकेबंदी का सामना करना पड़ सकता है।
अब तक ये जाहाज आ चुके हैं भारत
युद्ध शुरू होने के बाद पिछले एक महीने में भारत का झंडा लगे कम से कम चार जहाज—जग वसंत, पाइन गैस, शिवालिक और नंदा देवी—होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं। जहाज़ों की ट्रैकिंग से पता चला कि जग वसंत और पाइन गैस, जिनमें 90,000 टन से ज्यादा एलपीजी भरी थी, उन्होंने थोड़ा अलग रास्ता अपनाया। आम तौर पर जहाज़ सीधे छोटे रास्ते से अरब सागर की ओर जाते हैं, लेकिन इन दोनों जहाज़ों ने ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के बीच से होकर यह जलमार्ग पार किया।
फिलहाल, भारत के जहाजों को ईरान की तरफ से मिली यह अनुमति नई दिल्ली के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। खास बात यह है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात पर निर्भर करता है, इसलिए ऐसे अहम समुद्री रास्तों का खुला रहना बेहद जरूरी है।