LPG Crisis: LPG संकट के बीच IRCTC ने शुरू की नई व्यवस्था, अब ऐसे बनेगा खाना

LPG Crisis: जहां एक तरफ पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पेट्रोल-डीजल, CNG और सोने चांदी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, दूसरी तरफ देशभर में LPG सिलेंडरों की सप्लाई में आई कमी ने कई सेक्टरों को प्रभावित किया है।

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 12:40 PM
LPG संकट के बीच IRCTC ने शुरू की नई व्यवस्था

LPG Crisis: जहां एक तरफ पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पेट्रोल-डीजल, CNG और सोने चांदी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, दूसरी तरफ देशभर में LPG सिलेंडरों की सप्लाई में आई कमी ने कई सेक्टरों को प्रभावित किया है। लेकिन अब इस समस्या का सीधा असर रेलवे कैटरिंग सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है, जिसका IRCTC ने समाधान करते हुए एक बार फिर चलती ट्रेनों में खाना पकाने की व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि, इस बार खाना गैस पर नहीं, बल्कि बिजली से चलने वाले इंडक्शन स्टोव पर तैयार किया जाएगा।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, IRCTC हर दिन करीब 17 लाख यात्रियों के लिए 17 लाख से ज्यादा भोजन परोसता है। देशभर में लगभग 1400 ट्रेनों में कैटरिंग सेवाएं लगातार चलती रहती हैं। ऐसे में अगर LPG की सप्लाई में किसी तरह की कमी या दिक्कत आती है, तो इसका सीधा असर यात्रियों की भोजन व्यवस्था पर पड़ सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने पहले से ही वैकल्पिक इंतजाम और बैकअप व्यवस्था तैयार कर रखी है, ताकि किसी भी स्थिति में यात्रियों को खाने की सुविधा में कोई बाधा न आए।


IRCTC के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संजय कुमार जैन ने बताया कि एलएचबी (LHB) पैंट्री कारों में पहले से मौजूद सुरक्षा सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अब वहां बिजली से खाना पकाने की अनुमति दे दी गई है।

LPG कमी के बीच IRCTC ने की नई व्यवस्था

रेलवे के अनुसार, अब अधिकांश LHB पैंट्री कारों में इंडक्शन की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाले LHB कोच इस व्यवस्था के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं। बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी इंडक्शन कुकिंग सिस्टम लगाए गए हैं जिससे भोजन तैयार करने में किसी तरह की बाधा न आए और यात्रियों को समय पर खाना मिल सके।

इसके अलावा, IRCTC ने देशभर के रेलवे स्टेशनों पर चल रहे फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार केंद्रों को निर्देश दिया है कि वे अब धीरे-धीरे इंडक्शन कुकर और माइक्रोवेव का इस्तेमाल बढ़ाएं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में रेलवे की करीब 60% खाना बनाने की प्रक्रिया बिजली आधारित सिस्टम पर शिफ्ट हो सकती है।

एक दिन में 1,000 सिलेंडर

बता दें कि देशभर में रेलवे की क्लस्टर किचन, बेस किचन और अन्य भोजन केंद्रों को सुचारू रूप से चलाने के लिए रोजाना लगभग 1000 कमर्शियल LPG सिलेंडरों की जरूरत होती है। हाल के समय में गैस सप्लाई में आई कमी को देखते हुए रेलवे ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों के साथ समन्वय और मजबूत किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडरों की सप्लाई सुनिश्चित की जा सके।

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