Bengaluru News: डिजिटल पेमेंट के दौर में गलत ट्रांजैक्शन की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। लेकिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुई एक घटना ने लोगों का भरोसा इंसानियत पर और मजबूत कर दिया है। एक स्टार्टअप CEO ने जल्दबाजी में ऑटो का किराया चुकाते समय 156 रुपये की जगह गलती से ₹15,682 ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद ऑटो चालक ने जो ईमानदारी दिखाई, उसकी सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। ऑटो चालक की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोगों ने इसे ईमानदारी और सच्चाई की एक दुर्लभ मिसाल बताया है।
बेंगलुरु के एक स्टार्टअप संस्थापक और CEO शुबम गुने के साथ यह घटना उस समय हुई जब वह एक विदेशी क्लाइंट से मिलने के लिए सुबह-सुबह जल्दी में थे। क्लाइंट शहर में केवल एक दिन के लिए आया था और सुबह 7 बजे मीटिंग तय थी। शुबम ने लिंक्डइन पर शेयर किए गए अपने अनुभव में बताया कि वह देर हो रहे थे और ऑफिस पहुंचने की जल्दबाजी में ऑटो का किराया गूगल पे के जरिए चुका रहे थे।
ऑटो का किराया ₹156 था, लेकिन जल्दबाजी में उन्होंने गलती से ₹15,682 दर्ज कर दिए। फिर बिना स्क्रीन देखे उन्होंने पेमेंट कर दिया। उन्होंने LinkedIn पोस्ट में लिखा, "मैंने गलती से एक ऑटो चालक को ₹15,682 भेज दिए और फिर मेरी सुबह और भी खराब हो गई।"
शुबम के मुताबिक, जिस मीटिंग के लिए वह इतनी जल्दी में थे, वह भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। उन्हें लगा कि उन्होंने एक बड़ा कारोबारी मौका गंवा दिया है। मीटिंग खत्म होने के बाद जब वह नीचे लौटे, तब तक उन्हें यह भी पता नहीं था कि उनके खाते से ₹15,682 कट चुके हैं।
अल्ताफ ने दिखाया बड़ा दिल
लेकिन नीचे पहुंचकर उन्हें जो देखने को मिला, उसने उनका नजरिया बदल दिया। अल्ताफ नाम का ऑटो चालक वहीं खड़ा उनका इंतजार कर रहा था। अल्ताफ उनके पास आया और बताया कि उनसे गलती से ज्यादा पैसे ट्रांसफर हो गए हैं। इसके बाद उसने पूरी राशि ₹15,682 वापस कर दी।
सबसे खास बात यह रही कि उसने सिर्फ अतिरिक्त रकम नहीं लौटाई, बल्कि पूरी राशि वापस कर दी। शुबम ने कई बार उसे असली किराया ₹156 लेने के लिए कहा। साथ ही यह भी कहा कि इंतजार करने की वजह से उसका समय और कमाई दोनों का नुकसान हुआ है।
हालांकि अल्ताफ ने पैसे लेने से इनकार कर दिया। उसने कहा, "सर, यह हम दोनों के दिन की शुरुआत है।" यह घटना यहीं खत्म नहीं हुई। करीब एक सप्ताह बाद वही विदेशी क्लाइंट, जिसके साथ हुई मीटिंग को शुबम असफल मान रहे थे, दोबारा उनके संपर्क में आया और साथ काम करने की इच्छा जताई।
शुबम ने की ड्राइवर की तारीफ
शुबम ने बताया कि जैसे ही उन्हें यह खुशखबरी मिली, उनका ध्यान सबसे पहले उस सुबह और अल्ताफ की ईमानदारी की ओर गया। बाद में उन्होंने आभार स्वरूप अल्ताफ को ₹500 भेजे। अपने पोस्ट में शुबम ने लिखा कि उस दिन सबसे बड़ी जीत नया क्लाइंट नहीं था। बल्कि यह एहसास था कि ईमानदारी तब सबसे ज्यादा मायने रखती है जब उसे निभाना पूरी तरह आपकी इच्छा पर निर्भर हो।
सोशल मीडिया पर यह कहानी तेजी से वायरल हो गई हैं। हजारों लोगों ने अल्ताफ की ईमानदारी और मानवीय संवेदनाओं की सराहना की। कई यूजर्स ने लिखा कि ऐसे लोग ही समाज में अच्छाई और भरोसे को जिंदा रखते हैं। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि टेक्नोलॉजी भले ही तेजी से बदल रही हो। लेकिन ईमानदारी और इंसानियत जैसी मूल्यवान चीजें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।