Waste to Wealth: कचरे के ढेर से खड़ा किया ₹250 करोड़ का स्टार्टअप! जयपुर के दो दोस्तों की ये अनोखी कहानी हैरान कर देगी
Jaipur Startup: जयपुर के अभिषेक गुप्ता और अभिनव शेखर ने कचरे और वेस्ट मैनेजमेंट को कमाई का जरिया बनाकर ₹250 करोड़ की कंपनी खड़े करने का कारनामा कर दिखाया है। कॉलेज कैंपस के एक सफाई अभियान से शुरू हुआ 'वीवॉइस लैब' (WeVOIS Labs) का यह सफर आज 25 से अधिक शहरों तक पहुंच चुका है। IoT तकनीक और स्मार्ट ट्रैकिंग से 6 लाख टन से ज्यादा कचरा रीसायकल करने वाले इन युवाओं की कामयाबी 'फोर्ब्स अंडर-30' की लिस्ट में भी दर्ज हो चुकी है। जानिए इनकी अनोखी कहानी
इन युवाओं की कामयाबी 'फोर्ब्स अंडर-30' की लिस्ट में भी दर्ज हो चुकी है
Jaipur Waste Management Startup: देशभर में आज स्वच्छता अभियान को लेकर शहरों में इंदौर से आगे निकलने की होड़ है, जिसके लिए प्रशासन और शहरों की संस्थाएं लगातार लोगों को कचरे और साफ-सफाई के प्रति जागरूक करती हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इस बीड़े को खुद उठाते हैं। ऐसे ही जयपुर के दो युवा हैं, जिन्होंने कचरे और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के स्टार्टअप से ₹250 करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर दिया। आज यह सिर्फ एक सफल स्टार्टअप ही नहीं है, बल्कि 'फोर्ब्स अंडर-30' की लिस्ट तक इनके स्टार्टअप का डंका बज चुका है।
जयपुर के अभिषेक गुप्ता और अभिनव शेखर वशिष्ठ ने 2018 में 'वीवॉइस लैब' (WeVOIS Labs) कंपनी की शुरुआत की और आज उनका यह स्टार्टअप 25 से अधिक शहरों में काम कर रहा है। 'वीवॉइस लैब' के इस क्लीन-टेक स्टार्टअप की कहानी जयपुर के इन दोनों युवाओं के 2016 में कॉलेज कैंपस सफाई अभियान और वेस्ट अवेयरनेस कैंपेन से शुरू हुई थी। उस समय कॉलेज के इस सफाई अभियान को उन्होंने सिर्फ एक प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखा, बल्कि कचरे और सफाई के स्थाई समाधान पर विचार शुरू किया और यहीं से 'वीवॉइस लैब' स्टार्टअप की नींव पड़ी।
6 लाख टन से ज्यादा वेस्ट कचरा प्रोसेस करती है 'वीवॉइस लैब'
आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल 62 मिलियन टन कचरा निकलता है, जिसे या तो खुले में फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है। लेकिन जयपुर के अभिषेक गुप्ता और अभिनव शेखर की कंपनी 'वीवॉइस लैब' वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के रूप में अपनी खास पहचान रखती है। इस कंपनी का सिस्टम पूरी तरह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर आधारित है। इसमें हर घर, होटल और अस्पताल को 'रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन' (RFID) टैग दिया जाता है, जिससे कचरा उठाने से लेकर प्रोसेस होने तक रियल-टाइम मॉनिटरिंग होती है। इसमें कचरा कब उठा, किसने उठाया, कितना उठा, वर्कर की उपस्थिति, परफॉर्मेंस और प्रोसेस पर खास निगरानी रखी जाती है।
जयपुर की इस 'वीवॉइस लैब' कंपनी के जरिए हजारों वर्कर्स को रोजगार भी मिल रहा है। फिलहाल वीवॉइस लगभग ₹250 करोड़ का क्लीन-टेक स्टार्टअप बन चुका है, जो 25 शहरों में काम कर रहा है और हर साल 6 से 7 लाख टन से ज्यादा वेस्ट प्रोसेस कर रहा है।
गांवों में भी शुरू किया 'रूरल स्मार्ट विलेज सेंटर'
कचरे का निपटान और जागरूकता फैलाने का 'वीवॉइस लैब' का काम सिर्फ शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह गांवों में भी 'रूरल स्मार्ट विलेज सेंटर' के रूप में काम कर रहा है। यहां वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के साथ-साथ लोगों को रोजगार और स्वच्छता की शिक्षा भी दी जा रही है। हाल ही में 'वीवॉइस लैब' ने बिसलेरी के साथ मिलकर जयपुर में हर महीने 30 टन प्लास्टिक वेस्ट उठाना शुरू किया है। साथ ही 300 टन क्षमता वाला टेक्सटाइल वेस्ट रीसाइकलिंग प्लांट भी शुरू किया है। आने वाले समय में 10 और शहरों को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि 3 हजार टन प्लास्टिक वेस्ट को लैंडफिल में जाने से रोका जा सके।
लंबे समय से जयपुर के ये दो युवा टेक्सटाइल कचरे के वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग से रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को एक नई दिशा देने पर काम कर रहे हैं। कुछ ही दिनों में राजधानी जयपुर में 'वीवॉइस लैब' द्वारा टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग यूनिट शुरू की गई है, जिसके बाद से कचरे के सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लक्ष्यों पर काम किया जा रहा है।
'वीवॉइस लैब' के जरिए किस प्रकार होती है टनों कचरे की रीसाइकलिंग
'वीवॉइस लैब' खासतौर पर शहरों को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मील का पत्थर साबित हो चुकी है, जो अलग-अलग तरीकों से कचरे की रीसाइकलिंग करती है। 'वीवॉइस लैब' के वर्कर्स द्वारा एकत्रित कचरे का उपयोग अलग-अलग रूपों में किया जाता है; जैसे गीले कचरे को खाद बनाने के लिए भेजा जाता है, जबकि सूखे कचरे से कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच और वस्त्र जैसी सामग्रियां बनाने के लिए उसे अलग-अलग छांटा जाता है।
कंपनी की 'रीसूत्र' यूनिट में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है, जो कपड़ा अपशिष्ट को ट्रैक, प्रोसेस और पुनः उपयोग योग्य उत्पादों में परिवर्तित करने में सक्षम है। आमतौर पर एकत्रित कचरे का अधिकांश भाग लैंडफिल स्थलों (कचरे के ढेरों) में डाल दिया जाता है, जिससे हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है और पर्यावरण प्रदूषित होता है। लेकिन लैंडफिल स्थलों पर कचरे के ढेर को रोकने के लिए, 'वीवॉइस लैब' ने नगर निकायों की सहायता से प्रायोगिक परीक्षण भी किया है।
'वीवॉइस लैब' जनरेट कर रही है लोगों के लिए रोजगार
जयपुर की 'वीवॉइस लैब' एक अपशिष्ट प्रबंधन कंपनी है जो कचरे के संग्रहण, ट्रैकिंग, पृथक्करण और पुनर्चक्रण में सुधार के लिए तकनीक का उपयोग करती है। इसके साथ ही कंपनी का मुख्य फोकस टेक्सटाइल अपशिष्ट को पुनः उपयोगी संसाधनों में बदलकर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने पर रहता है। इसके अलावा कंपनी अधिक से अधिक लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध करा रही है, जो एक स्मार्ट सिस्टम के जरिए काम करता है।
कंपनी में एक खास 'रूट मैनेजर सॉफ्टवेयर' डिजाइन किया गया है, जो सहायकों के लिए आपके घर तक पहुंचने और समय पर सेवा प्रदान करने का मार्ग निर्धारित करता है। साथ ही, कंपनी का सुव्यवस्थित अलर्ट प्रबंधन प्रणाली वाला मोबाइल ऐप उपभोक्ताओं को निर्धारित पिकअप से पहले हर बार सूचना प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।