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'जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा', जमीयत चीफ मौलाना मदनी के बयान पर बवाल

Mahmood Madani : मदनी ने कहा कि समाज और मीडिया में जिहाद को जिस रूप में दिखाया जा रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने केंद्र और मीडिया पर आरोप लगाया कि वे एक पवित्र अवधारणा को गलत दिशा में पेश कर रहे हैं। “लव जिहाद”, “थूक जिहाद” और “लैंड जिहाद” जैसे शब्दों को उन्होंने जिहाद के असली अर्थ से बिल्कुल अलग बताया

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 29, 2025 पर 6:07 PM
'जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा', जमीयत चीफ मौलाना मदनी के बयान पर बवाल
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष महमूद मदनी ने एक बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष महमूद मदनी ने एक बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि “अगर अत्याचार होगा तो उसका जवाब भी ज़रूर होगा और सरकार व न्यायपालिका पर आरोप लगाया कि वे अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कमजोर कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद BJP ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि मदनी जानबूझकर मुसलमानों को उकसा रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

मदनी ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और अन्य मामलों में आए कई हालिया फैसले दिखाते हैं कि न्यायपालिकासरकारी दबावमें काम कर रही है। उनका कहना है कि हाल के वर्षों में कई ऐसे निर्णय लिए गए हैं जोसंविधान द्वारा दिए गए अल्पसंख्यक अधिकारों का सीधे तौर पर उल्लंघन करते हैं।”

मदनी ने 1991 के Places of Worship Act के बावजूद लगातार उठाए जा रहे विवादित मामलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे घटनाक्रम बताते हैं कि संविधान के मूल प्रावधान कमजोर हो रहे हैं। उनका कहना था, “सुप्रीम कोर्ट तभी ‘सुप्रीम’ कहलाने लायक है, जब वह संविधान की रक्षा करे।” उन्होंने आगे कहा, “अगर अदालत संविधान की सुरक्षा नहीं कर पाती, तो फिर वह देश की सर्वोच्च संस्था कहलाने का हक भी खो देती है।”

‘जिहाद को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है’

मदनी ने कहा कि समाज और मीडिया में जिहाद को जिस रूप में दिखाया जा रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने केंद्र और मीडिया पर आरोप लगाया कि वे एक पवित्र अवधारणा को गलत दिशा में पेश कर रहे हैं। “लव जिहाद”, “थूक जिहाद” और “लैंड जिहाद” जैसे शब्दों को उन्होंने जिहाद के असली अर्थ से बिल्कुल अलग बताया। मदनी ने कहा, “जिहाद मूल रूप से एक पवित्र विचार था और रहेगा।” उनके अनुसार, धर्मग्रंथों में जिहाद का मतलब दूसरों की भलाई और सेवा से है, न कि हिंसा से। उन्होंने अपने विवादित बयान को दोहराते हुए कहा, “जब अन्याय होगा, तो उसका जवाब देना भी जरूरी होगा।”

मदनी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का सेक्युलर और लोकतांत्रिक ढांचा किसी तरह की हिंसा की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा, “भारत में मुसलमान हमेशा संविधान के प्रति वफादार रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनके शब्दों में, “अगर सरकार यह काम ठीक से नहीं करती, तो उसकी जिम्मेदारी तय होती है।”

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