AI Impact Summit: भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत बना रहा है। भारत में कंप्यूट कपैसिटी बहुत कम कीमत में ऑफर की जा रही है। संभवत: यह दुनिया में सबसे सस्ते कंप्यूट कपैसिटी में से एक होगा। केंद्रीय स्किल डेवलपमेंट एंव आंत्रप्रेन्योरशिप राज्य मंत्री मंत्री जयंत चौधरी ने 20 फरवरी को इंडिया एआई समिट में यह बात कही।
कंप्यूट सिनेमा के टिकट से भी सस्ता
चौधरी ने कहा कि इंडिया करीब 65 रुपये प्रति घंटा के रेट से कंप्यूट एक्सेस दे रहा है। यह सिनेमा के एक टिकट की कीमत से भी कम है। यह कदम IndiaAI Mission का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के जरिए इसके एक लाख जीपीयू तक पहुंच जाने की संभावना है।
कंप्यूट का मतलब प्रोसेसिंग पावर और रिसोर्सेज से है, जिसका इस्तेमाल कंप्यूटिंग सिस्टम में कंप्यूटेशंस, अप्लिकेशंस रन करने और डेटा हैंडल करने में होता है। कंप्यूट के तहत सीपीयू, जीपीयू और मेमोरी जैसे हार्डवेयर आते हैं जो कैलकुलेशन और इंफॉर्मेशन को प्रोसेस करते हैं।
एआई में इंडिया की रफ्तार तेज
चौधरी ने कहा कि इंडिया AI की रेस में तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर पॉलिसी के मामले में सहयोग और एआई की संभावनाओं को समझकर भारत एआई से जुड़े स्ट्रक्चरल चैलेंजेज का सामना कर सकता है। उन्होंने कहा, "एआई हमें समस्याओं के समाधान में मदद कर सकता है।" उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का उद्देश्य इनसान की जिंदगी को आसान बनाना होना चाहिए।
एआई के लिए युवाशक्ति का इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि एक अरब से ज्यादा आबादी वाले भारत के पास एआई प्रोड्यूसर्स और इनोवेटर्स की पूरी पीढ़ी तैयार करने के लिए आबादी की युवा शक्ति का इस्तेमाल करने का मौका है। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ ग्लोबल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं बना रह सकता। उन्होंने यह भी कहा कि रेगुलेशंस इनोवेशन के रास्ते में बाधा नहीं बनने चाहिए। सरकार का काम इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना और एक्सपेरिमेंटेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देना है।
एआई ईकोसिस्टम में एजुकेशन की भूमिका
चौधरी ने इंडिया के एआई ईकोसिस्टम में एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार और संस्थाएं टेक्नोलॉजी के मामले में लीडरशिप रोल के लिए रिसर्च और एजुकेशन के महत्व को समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि आज एकैडेमिया पहले के मुकाबले ज्यादा जरूरी है। हर परिवार रिसर्च और एजुकेशन की वैल्यू समझ रहा है।