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Justice Sharma Vs Kejriwal: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल को दिया तगड़ा झटका, वे 10 कारण जिनकी वजह से खारिज हो गई याचिका

Justice Sharma Vs Arvind Kejriwal: दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। एक घंटे से अधिक समय तक हुई सुनवाई में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि किसी भी वादी को बिना किसी सबूत के जज पर फैसला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Apr 21, 2026 पर 10:30 AM
Justice Sharma Vs Kejriwal: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल को दिया तगड़ा झटका, वे 10 कारण जिनकी वजह से खारिज हो गई याचिका
Justice Sharma Vs Arvind Kejriwal: शराब नीति मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से अरविंद केजरीवाल को झटका लगा है

Justice Sharma Vs Arvind Kejriwal: दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार (20 अप्रैल) को आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल एवं अन्य लोगों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। एक घंटे से अधिक समय तक हुई सुनवाई में जस्टिस शर्मा ने कहा कि किसी भी वादी को बिना किसी सबूत के जज पर फैसला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि जज किसी वादी के पूर्वाग्रह के निराधार डर को दूर करने के लिए खुद को मामले से अलग नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक नेता को बिना किसी आधार के किसी संस्था को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि किसी जज पर व्यक्तिगत हमला न्यायपालिका पर ही हमला होता है।

जस्टिस शर्मा ने निष्कर्ष निकाला कि उन्हें हटाने की याचिकाओं में दर्ज डिटेल्स अनुमानों और कथित झुकावों पर आधारित था। जज ने आगे कहा, "यह अदालत अपने और संस्था के लिए खड़ी रहेगी... मैं खुद को इस मामले से अलग नहीं करूंगी।" अरविंद केजरीवाल के अलावा, आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी जज को मामले से अलग करने के लिए आवेदन दायर किए थे।

केजरीवाल ने जज पर उठाए थे सवाल

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