बिहार के मुजफ्फपुर में पैदा हुए कनिष्क नारायण ब्रिटेन के PM एंडी बर्नहैम की कैबिनेट में बन गए AI मिनिस्टर! जानिए इनकी कहानी

Kanishka Narayan: ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने अपनी कैबिनेट का गठन शुरू कर दिया है। पीएम बर्नहैम ने अपनी कैबिनेट में भारतीय मूल के दो सांसदों को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें सबसे खास नाम कनिष्क नारायण का है। इन्हें ब्रिटेन का नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मंत्री बनाया गया है

अपडेटेड Jul 21, 2026 पर 1:54 PM
Kanishka Narayan: ब्रिटेन के पीएम ने अपनी कैबिनेट में भारतीय मूल के दो सांसदों को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है

Kanishka Narayan: ब्रिटेन की राजनीति से भारतीय मूल के लोगों के लिए एक बेहद गर्व करने वाली खबर सामने आई है। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने अपनी कैबिनेट का गठन शुरू कर दिया है। पीएम बर्नहैम ने अपनी कैबिनेट में भारतीय मूल के दो सांसदों को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें सबसे खास नाम कनिष्क नारायण का है। इन्हें ब्रिटेन का नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मंत्री बनाया गया है। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा यह पहली बार हुआ है जब AI मंत्री के पद को कैबिनेट स्तर का दर्जा दिया गया है।

कनिष्क नारायण का जन्म भारत में बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ था। वहीं, दूसरी तरफ भारतीय मूल की एक और सांसद लिसा नंदी (Lisa Nandy) को कल्चर सेक्रेटरी के पद पर बरकरार रखा गया है। आइए जानते हैं बिहार के मुजफ्फरपुर से ब्रिटेन की संसद और अब कैबिनेट तक पहुंचने वाले कनिष्क नारायण और लिसा नंदी की पूरी कहानी।

ब्रिटेन में नई सरकार: एंडी बर्नहैम बने देश के नए प्रधानमंत्री


स्टारमर के आधिकारिक रूप से ब्रिटेन के पीएम का पद छोड़ने के बाद 56 वर्षीय एंडी बर्नहैम ने सोमवार को ब्रिटेन के 10वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला (एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री)। पद संभालते ही उन्होंने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर देश को संबोधित करते हुए एक नया राजनीतिक मॉडल बनाने और नई अर्थव्यवस्था के निर्माण का संकल्प लिया। बर्नहैम ने अपने पहले के करीबी नेताओं को कैबिनेट से हटाते हुए बड़े बदलाव किए हैं। उनकी कैबिनेट में जॉन हीली को चांसलर, एड मिलिबैंड को विदेश सचिव और वेस स्ट्रीटिंग को रक्षा सचिव बनाया गया है। इसी फेरबदल के तहत दो भारतीय मूल के नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं।

मुजफ्फरपुर से ऑक्सफोर्ड और स्टैनफोर्ड तक: कनिष्क नारायण का सफर

ब्रिटेन के नए AI मंत्री कनिष्क नारायण की जीवन यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है। कनिष्क का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ था। वह 12 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ यूके के कार्डिफ चले गए थे। कैथेज हाई स्कूल से शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने दुनिया की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन किया।

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कनिष्क ने सिलिकॉन वैली और यूके में ग्लोबल टेक्नोलॉजी की फील्ड में काम किया। उन्होंने AI, फिनटेक और जलवायु परिवर्तन की पहलों में अग्रणी उद्यमियों की मदद की। इसके अलावा उन्होंने प्रमुख वैश्विक निवेश बैंक लाजार्ड में भी काम किया। यहां उन्होंने बड़े ब्रिटिश कंपनियों के बोर्ड, सरकारी वित्त मंत्रालयों और यूरोप व अमेरिका के टेक एंटरप्रेन्योर्स को सलाह दी।

कनिष्क नारायण सितंबर 2025 में कीर स्टारमर की सरकार के तहत AI और ऑनलाइन सुरक्षा के जूनियर मंत्री बने थे। इससे पहले उन्होंने 2024 के आम चुनाव में वेले ऑफ ग्लैमर्गन सीट से जीत हासिल कर कंजर्वेटिव पार्टी के 14 साल के दबदबे को खत्म किया और लेबर पार्टी की वापसी कराई। उन्होंने जुलाई 2024 से सितंबर 2025 के बीच पर्यावरण, भोजन और ग्रामीण मामलों के विभाग के लिए संसदीय निजी सचिव के रूप में भी काम किया।

सामाजिक सेवा से कनिष्क का गहरा जुड़ाव

कनिष्क नारायण का स्थानीय मुद्दों और सामाजिक सेवा से गहरा जुड़ाव रहा है। वह साउथ वेल्स में सोशल मोबिलिटी और शिक्षा पर केंद्रित एक गैर-लाभकारी कार्यक्रम अटेन वेल्स के सह-संस्थापक रहे हैं। 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उन्होंने हेल्प योर हाई स्ट्रीट नाम का एक नैशनल कैंपेन शुरू किया था। इस कैंपेन में लोकल दुकानों को ग्राहकों से जोड़कर डिलीवरी और गिफ्ट कार्ड बिक्री में मदद की गई। 2021 से 2023 के बीच उन्होंने 'सिटीजन एडवाइस ब्यूरो' के ट्रस्टी और यूके के शीर्ष विदेश नीति थिंक टैंक चैथम हाउस के सलाहकार पैनल में 2 साल तक काम किया।

AI और नौकरियों को लेकर कनिष्क का नजरिया

कनिष्क नारायण टेक्नोलॉजी के भविष्य को लेकर काफी मुखर रहे हैं। उनका मानना है कि बदलती तकनीक ब्रिटेन को नवाचार की अपनी विरासत वापस पाने का सबसे बड़ा अवसर देती है। उन्होंने कहा है कि यूके की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक शक्ति के लिए AI का महत्व स्थायी सत्य है। हालांकि उन्होंने AI के कारण नौकरियों के नुकसान की चिंताओं को भी स्वीकार किया है। पॉलिटिको के प्लेबुक लाइव कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि यह बदलाव एक निष्पक्ष बदलाव होना चाहिए जो पूरे देश के लिए काम करे।

कैबिनेट में दूसरी भारतीय मूल की नेता: लिसा नंदी

एंडी बर्नहैम की कैबिनेट में शामिल होने वाली दूसरी भारतीय मूल की नेता लिसा नंदी हैं। लीसा को कल्चरल सेक्रेटरी के पद पर बरकरार रखा गया है। लिसा का जन्म 1979 में मैनचेस्टर में हुआ था। उनके पिता दीपक नंदी कोलकाता से थे जबकि उनकी मां लुईस बायर्स ब्रिटिश मूल की हैं। लिसा ने न्यूकैसल यूनिवर्सिटी से राजनीति और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के बीरकबिक से पब्लिक पॉलिसी की पढ़ाई की। उन्होंने बेघर लोगों के लिए काम करने वाली संस्था सेंटरपॉइंट और द चिल्ड्रेन्स सोसाइटी में वरिष्ठ नीति सलाहकार के रूप में काम किया।

ये भी पढ़ें- Akhil Joyan: शादी से दो महीने पहले मातम! रूस के हमले में भारतीय नाविक की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

2010 में लिसा Wigan निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतकर सांसद बनीं और इस क्षेत्र की पहली महिला व पहली एशियाई सांसद बनीं। लिसा नंदी और पीएम एंडी बर्नहैम का रिश्ता 2015 से है। तब लिसा ने लेबर पार्टी के नेतृत्व की रेस में बर्नहैम का समर्थन किया था। 2020 में लिसा खुद कीर स्टारमर के खिलाफ नेतृत्व की दौड़ में खड़ी हुई थीं और तीसरे स्थान पर रही थीं। इसके बाद उन्हें शैडो फॉरेन सेक्रेटरी बनाया गया था। जुलाई 2024 में स्टारमर ने उन्हें संस्कृति सचिव बनाया था, जिस पद पर बर्नहैम ने भी उन्हें बनाए रखा है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।