कर्नाटक में नेतृत्व संघर्ष की अटकलों के बीच, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ मतभेद की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। पत्रकारों से बात करते हुए, शिवकुमार ने दोहराया कि कांग्रेस एकजुट है और अंदरूनी कलह पर नहीं, बल्कि शासन और चुनावी तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा, "मुझमें और मुख्यमंत्री में कोई अंतर नहीं है। पार्टी अध्यक्ष होने के नाते, मुझे अपनी सीमाएं पता हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सिद्धारमैया से न तो शब्दों में और न ही कामों में कोई असहमति जताई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की प्राथमिकता कर्नाटक की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना और 2028 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना है।
शिवकुमार ने यह भी कहा कि वह और मुख्यमंत्री राज्य से संबंधित ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए जल्द ही एक सर्वदलीय बैठक बुलाएंगे।
उनकी यह टिप्पणी सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच नाश्ते पर हुई एक घंटे की बैठक के एक दिन बाद आई है, जिसका उद्देश्य नेतृत्व परिवर्तन की बढ़ती अटकलों के बीच एकजुटता दिखाना था। कांग्रेस आलाकमान ने कथित तौर पर दोनों नेताओं से एकजुटता बनाए रखने और ऐसे सार्वजनिक बयानों से बचने को कहा था, जिन्हें गुटबाजी का संकेत माना जा सकता है।
हालांकि, विपक्ष ने सद्भाव की इस कोशिश का मजाक उड़ाया और इसे "ब्रेकअप पर मेकअप" प्रैक्टिस बताया और आरोप लगाया कि यह बैठक गहरी होती आंतरिक दरार को छिपाने का एक सतही कोशिश है।
20 नवंबर को, जब सिद्धारमैया की सरकार अपने आधे कार्यकाल पर पहुंची, नेतृत्व में संभावित बदलाव की अटकलें तेज हो गईं। सिद्धारमैया ने बार-बार कहा है कि वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने का इरादा रखते हैं, और इसके लिए उन्होंने मतदाताओं की ओर से दिए गए जनादेश और कांग्रेस की प्रमुख गारंटी योजनाओं को पूरी तरह से लागू करने की प्रतिबद्धता का हवाला दिया है।
इस बीच, शिवकुमार शीर्ष पद के लिए उत्सुक बताए जा रहे हैं, और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुए एक "गुप्त समझौते" का हवाला देते हुए कहते हैं कि मुख्यमंत्री का पद 2.5 साल बाद बारी-बारी से दिया जाएगा। हालांकि, कांग्रेस ने कभी भी आधिकारिक तौर पर इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन दोनों पक्षों के वफादारों की तरफ से पर्दे के पीछे लॉबिंग की कोशिश जारी रही हैं।
कांग्रेस आलाकमान का फैसला जल्द आने की उम्मीद
सतह के नीचे सुलगते तनाव के बीच, अंतिम फैसला दिल्ली में पार्टी नेतृत्व पर निर्भर है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उचित समय पर हस्तक्षेप करने की उम्मीद है। सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वे आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे। फिलहाल, पार्टी इस बात पर अड़ी है कि एकता बरकरार है।