Kashmiri Pandit: कश्मीर घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को एक लेटर के जरिए घमकी दी गई है। उन्हें घर पर रहने और सतर्क रहने के लिए कहा गया है। यह निर्देश एक ऑनलाइन धमकी भरे पत्र के बाद दिया गया है। इसमें उन्हें 'अपना तरीका बदलने' की चेतावनी दी गई थी। इतना ही हीं कुछ कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी जारी किए गए हैं।
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर सरकार ने विभागों को मौखिक निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों को छुट्टी पर रखें और उन्हें सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दें। यह घटनाक्रम पिछले महीने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में एक ईंट भट्ठे पर दो प्रवासी मजदूरों की हत्या के लगभग एक सप्ताह बाद सामने आया है।
धमकी भरे लेटर की पुलिस जांच शुरू
पुलिस उस लेटर की सच्चाई की जांच कर रही है, जिसे 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' नाम के एक समूह ने ऑनलाइन जारी किया था। सुरक्षा अधिकारियों को शक है कि यह समूह लश्कर-ए-तैयबा का ही एक मुखौटा संगठन हो सकता है।
एक पुलिस अधिकारी ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया, "यह ग्रुप पहली बार जुलाई में सामने आया था, जब इसने (हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर) आतंकी बुरहान वानी की पुण्यतिथि पर एक पोस्टर जारी किया था। ऐसा लगता है कि यह लश्कर का ही एक और छद्म समूह है।"
खबरों के अनुसार, पत्र में छह कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम थे, जो सभी राजस्व विभाग (रेवेन्यू डिपार्टमेंट) से जुड़े हैं। धमकी वाले इस लेटर में उनके काम को आतंकवादियों की कथित संपत्तियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई से जोड़ा गया था।
हालांकि सरकार की ओर से कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि विभागों, खासकर स्कूलों और राजस्व विभाग को मौखिक रूप से कर्मचारियों को घर पर रहने की अनुमति देने के लिए कहा गया था।
लंबे समय के समाधान की मांग
हालांकि, स्कूल शिक्षा निदेशक नसीर अहमद वानी ने इस तरह का कोई आदेश जारी होने से इनकार किया। वानी ने अखबार को बताया, "हमने किसी भी कर्मचारी को घर से काम करने या छुट्टी लेने के लिए नहीं कहा है। सभी कर्मचारी नियमित रूप से ड्यूटी पर आ रहे हैं।" खबरों के अनुसार, प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
9,000 प्रवासी कर्मचारी करते हैं काम
सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों के नाम पत्र में हैं, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहने और 20 अगस्त तक काम पर न आने के लिए कहा गया है। 'ऑल प्राइम मिनिस्टर्स पैकेज एम्प्लॉइज एसोसिएशन' के अध्यक्ष सनी रैना ने बताया कि अभी घाटी में लगभग 9,000 प्रवासी कर्मचारी काम कर रहे हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पिछले महीने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में एक ईंट भट्ठे पर दो प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी गई थी। उस घटना के करीब एक हफ्ते बाद धमकी पत्र के सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।
फिलहाल पुलिस धमकी पत्र की वास्तविकता, इसे जारी करने वाले संगठन और इसके पीछे मौजूद लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि लेटर में कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी किस तरह हासिल की गई। साथ ही क्या इसके पीछे कोई संगठित आतंकी नेटवर्क काम कर रहा है।