Koel Mallick Resign: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया है। हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजह को लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। कोएल मलिक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों की संख्या घटकर 9 रह गई है। इससे पहले भी पार्टी के कुछ सांसद विभिन्न कारणों से सदन की सदस्यता छोड़ चुके हैं।
कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में उनके इस फैसले को राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस इस्तीफे पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है कि पार्टी उनकी जगह किसे राज्यसभा भेजेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी इस मुद्दे पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकती है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि राज्यसभा सचिवालय इस्तीफा स्वीकार करने के बाद आगे की प्रक्रिया कब पूरी करता है। कोएल मलिक का असली नाम रुक्मिणी मल्लिक है। वह कई बंगाली फिल्मों में काम कर चुकी हैं। खास बात यह है कि वह इसी साल अप्रैल में सांसद बनी थीं।
मदन मित्रा ने भी छो़ड़ा साथ
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले विधायक मदन मित्रा बुधवार को नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए। विधायक ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी। कामरहाटी से विधायक मित्रा ने घोषणा की है कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।
इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो बीते कुछ महीने से अभूतपूर्व बगावत का सामना कर रहा है। उन्होंने घोषणा की है कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में अब कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। हालांकि, वह तृणमूल कांग्रेस के विधायक बने रहेंगे। पिछले कुछ महीनों से ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व को लगातार चुनौती दी है।
मित्रा ने कहा कि गुट बदलने से पहले उन्होंने अपने फैसले के बारे में ममता बनर्जी को सूचित कर दिया था। मित्रा ने यह भी घोषणा की है कि वह 21 जुलाई को ऋतब्रत बनर्जी गुट द्वारा आयोजित किए जा रहे शहीद दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। बागी नेताओं ने एक समानांतर संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की है। पार्टी मुख्यालय पर अपना नियंत्रण होने का दावा किया है। जबकि ममता बनर्जी गुट ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
मित्रा के इस कदम को लेकर अटकलें मंगलवार रात से ही तेज हो गई थीं, जब उन्होंने बागी विधायक संदीपन साहा के आवास का दौरा किया था। मित्रा ने इस बात को खारिज किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के कारण उन्होंने गुट बदला। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा और तृणमूल कांग्रेस के पतन के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।