लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पास हो गया है। बता दें कि, संसद के मानसून सत्र में बुधवार को एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मंगलवार को जहां कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के बयान पर काफी हंगामा हुआ वहीं बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर भी काफी गहमागहमी देखने को मिली। वहीं इनसबके बीच TMC सांसद महुआ मोइत्रा का संसद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा का एक छोटा सा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो उस समय का है, जब टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर अपनी बात रख रहे थे। उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सांसद लगातार बीच में टोकाटाकी कर रहे थे।
इसी दौरान महुआ मोइत्रा बार-बार अध्यक्ष से व्यवस्था बनाए रखने की अपील करती नजर आईं। उन्होंने कहा, "सर, इन्हें शांत कराइए" और "चुप रहिए, चर्चा होने दीजिए।" उन्होंने सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर बैठने और बहस को बिना बाधा के चलने देने की भी अपील की। इसी बीच उनकी तंज भरी हंसी का एक पल कैमरे में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
इस दौरान सदन का माहौल और ज्यादा गरमा गया। हंगामा बढ़ने पर अध्यक्ष ने महुआ मोइत्रा से कई बार अपनी सीट पर बैठने और शोर-शराबा बंद करने के लिए कहा। कुछ देर बाद जब चर्चा दोबारा शुरू हुई, तो महुआ मोइत्रा अपनी सीट पर बैठ गईं और हेडफोन लगा लिया। इसी दौरान उनके चेहरे पर हल्की व्यंग्यात्मक मुस्कान और हंसी दिखाई दी, जो सदन के माइक्रोफोन में भी रिकॉर्ड हो गई। इसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी बहस के बीच चर्चा जारी रही।
अभिषेक बनर्जी ने बिल का समर्थन किया, सरकार पर उठाए सवाल
लोकसभा में बोलते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी 'एंटी-पेपर लीक बिल' का समर्थन करती है, लेकिन सरकार के कामकाज का नहीं। उन्होंने कहा कि सिर्फ यह कानून बनने से उन लाखों युवाओं का दर्द खत्म नहीं होगा, जिनका भविष्य पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि न्याय की उम्मीद लेकर आए छात्रों को सहानुभूति मिलने के बजाय बैरिकेड्स और पैलेट गन का सामना करना पड़ा। अभिषेक बनर्जी ने यह भी कहा कि यह बिल उन छात्रों के टूटे हुए सपनों को वापस नहीं ला सकता, जिनकी परीक्षा रद्द होने के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर गया।