अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग बीते 15 दिनों से जारी है। वहीं इस युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट में तनाव भी चरम पर है। वहीं जंग के महौल के बीच भारत में गहराए एलपीजी संकट (LPG Crisis India) से सिलेंडरों की मारामारी मची है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पैनिक सिलेंडर बुकिंग या सप्लाई में रुकावट की चिंता के बीच घबराहट में बुकिंग का आंकड़ा 88 लाख से ज्यादा हो गया। वहीं इस मारामारी के बीच बेंगलुरू से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है।
देश के कई हिस्सों में एलपीजी की कमी के बीच बेंगलुरू के Theo Cafe का एक बिल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, एक यूजर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कैफे की रसीद की फोटो शेयर की, जिसमें लेमोनेड के ऑर्डर पर “गैस क्राइसिस चार्ज” (Gas Crisis Charge) जोड़ा गया है। बिल के अनुसार दो मिंट लेमोनेड, जिनकी कीमत 179 रुपये प्रति ड्रिंक थी, कुल 358 रुपये हुए। पहले 5 प्रतिशत यानी 17.90 रुपये की छूट दी गई, लेकिन इसके बाद 2.5 प्रतिशत CGST, 2.5 प्रतिशत SGST और 5 प्रतिशत “गैस क्राइसिस चार्ज” जोड़ दिया गया, जिससे कुल बिल बढ़कर 374 रुपये हो गया। यह बिल अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
बता दें कि, देश में एलपीजी की सप्लाई में आ रही दिक्कतों का असर अब होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर भी दिखने लगा है। दरअसल मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण ग्लोबल गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे भारत के कई हिस्सों में एलपीजी की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। इस वजह से खासकर शहरी इलाकों के होटल, रेस्टोरेंट और पब्लिक कैंटीन सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई जगहों पर खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी बताई जा रही है। हालात ऐसे हैं कि कुछ रेस्टूरेंट्स ने अपने मेन्यू में कटौती कर दी है, कुछ खास डिश बनाना बंद कर दिया है, जबकि कुछ जगहों पर काम जारी रखने के लिए दूसरे ईंधनों का सहारा लिया जा रहा है।
देश में LPG की किल्लत की खबरें
एलपीजी की कमी के बीच दिल्ली NCR, बिहार, बंगाल और ओडिशा सहित कई जगहों पर गैस वितरण केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, क्योंकि लोग घरेलू गैस सिलेंडर लेने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कुछ इलाकों में रेस्टोरेंट को गैस की कमी के कारण कुछ समय के लिए अपना काम भी बंद करना पड़ा है, वहीं जमाखोरी की खबरें भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में आई रुकावट से जुड़ी है, जो होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद बढ़ गई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया भर में तेल और एलपीजी की बड़ी मात्रा की ढुलाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।