लखनऊ में बुधवार को उस वक्त सियासी माहौल गरमा गया, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शहर की मेयर सुषमा खरकवाल के घर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। आरोप है कि मेयर की एक टिप्पणी को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ, जिसे सपा ने अखिलेश यादव की दिवंगत मां से जोड़कर अपमानजनक बताया।
दरअसल, मेयर सुषमा खर्कवाल के बयान के बाद पार्टी और खुद अखिलेश ने इसे सीधे अपनी मां का अपमान बताया और इसी को लेकर SP कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान मेयर के खिलाफ नारेबाजी भी की गई, जिससे राजधानी में नया राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया।
विवाद बढ़ने पर मेयर सुषमा खर्कवाल ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि उनका इशारा किसी एक व्यक्ति की मां की तरफ नहीं था, बल्कि महिलाओं के सम्मान को लेकर था। सुषमा ने कहा कि उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि जिन नेताओं के घर में मां, बहन और बेटी हैं, उन्हें महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए।
उन्होंने न्यूज एजेंसी IANS से बात करते हुए कहा, "मेयर सुषमा खर्कवाल ने कहा, "आज सुबह कुछ लोग मेरे घर आए, उन्होंने 'मुर्दाबाद' के नारे लगाए, मेरी नेमप्लेट पर जूता मारा और मुझे गालियां दीं। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहती। उनकी पार्टी ने उन्हें जिस तरह के संस्कार दिए हैं, उनके इन कृत्यों से वे सबके सामने आ गए हैं।"
इस पूरे मामले पर अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी की मां का अपमान भारतीय समाज में कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। अखिलेश ने लिखा कि एक महिला होकर दूसरी महिला का अपमान करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और राजनीति में इस तरह की भाषा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
अखिलेश ने आगे कहा कि राजनीतिक मजबूरी में किसी की दिवंगत मां का नाम घसीटना बेहद निंदनीय है। उन्होंने मेयर को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीति में मर्यादा और संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी माफी की उम्मीद नहीं है, क्योंकि कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनके बाद माफी का भी कोई मतलब नहीं रह जाता।
अब इस बयानबाजी के बाद भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है, और लखनऊ की राजनीति में यह मामला नई सियासी बहस का मुद्दा बन गया है।