Maharashtra News: मुंबई के डिप्टी मेयर संजय घाड़ी ने बुधवार (14 मई) को पांच सितारा होटल और मशहूर हस्तियों के स्वामित्व वाले आउटलेट समेत दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों को एक महीने के भीतर देवनागरी लिपि में मराठी में लिखे साइनबोर्ड प्रमुखता से लगाने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न होने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्देश का पालन नहीं किया गया तो 'शिव सेना जैसी' प्रतिक्रिया दी जाएगी। डिप्टी मेयर ने मुंबई की सभी दुकानों, होटलों और दफ्तरों में एक महीने के अंदर मराठी साइनबोर्ड लगाने का आदेश दिया गया है।
बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के दुकानों और प्रतिष्ठान विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार मराठी में लिखे साइनबोर्ड अनिवार्य हैं। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर बीएमसी कानून समिति की अध्यक्ष दीक्षा कारकर भी मौजूद थीं।
डिप्टी मेयर ने बताया कि मुंबई में लगभग 9 लाख दुकानें और प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 5,020 ने अभी तक मराठी साइनबोर्ड प्रदर्शित करने के अनिवार्य नियम का पालन नहीं किया है। पीटीआई के मुताबिक घाड़ी ने कहा, "चाहे वह पांच सितारा होटल हो या कोई अन्य प्रतिष्ठान, मराठी में साइनबोर्ड लगाना अनिवार्य है।"
उन्होंने कहा कि अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण करना आवश्यक है। घाड़ी ने चेतावनी दी कि यदि आउटलेट एक महीने के भीतर प्रमुखता से दिखाई देने वाले मराठी साइनबोर्ड लगाने में विफल रहते हैं, तो उनके संगठन के कार्यकर्ता पार्टी प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देशों के अनुसार 'शिव सेना शैली में' जवाब देंगे।
BMC के नए आदेश के तहत सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपना नाम देवनागरी लिपि में मराठी भाषा में लिखना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बताया कि मराठी में लिखे अक्षर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। यह अन्य भाषाओं के साइनबोर्ड की तुलना में आकार में बड़े या उतने ही प्रमुख होने चाहिए। BMC ने कहा कि समय सीमा समाप्त होने के बाद निरीक्षण अभियान शुरू किए जाएंगे।
अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का मकसद मराठी भाषा की पहचान को बढ़ावा देना और स्थानीय भाषा में साइनबोर्ड लगाने से जुड़े राज्य के पुराने नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। महाराष्ट्र में यह मुद्दा अक्सर राजनीतिक बहस का विषय रहा है। क्षेत्रीय पार्टियां बार-बार मराठी साइनबोर्ड से जुड़े नियमों को और सख्ती से लागू करने की मांग करती रही हैं। महाराष्ट्र सरकार ने इससे पहले नगर निकायों को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी प्रतिष्ठान अपने नाम प्रमुखता से मराठी में लिखे।
BMC अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जो व्यवसाय इस आदेश की अनदेखी करेंगे, उन्हें 'महाराष्ट्र दुकानें और प्रतिष्ठान अधिनियम' (Maharashtra Shops and Establishments Act) और संबंधित नगरपालिका नियमों के तहत जुर्माना या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इससे एक नया विवाद भी शुरू हो गया है।