Maharashtra Politics: कांग्रेस का साथ छोड़ BJP से हाथ मिलाएंगे शरद पवार? फडणवीस संग देर रात हुई बैठकों से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल

Maharashtra Politics: पूर्व कृषि मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के मुखिया शरद पवार को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। मंगलवार (14 जुलाई) देर रात राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अलग-अलग मुलाकातों ने शरद पवार के अगले राजनीतिक कदम को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है

अपडेटेड Jul 15, 2026 पर 12:28 PM
Maharashtra Politics: दावा किया जा रहा है कि शरद पवार जल्द ही 'इंडिया' अलायंस का साथ छोड़कर NDA से हाथ मिला सकते हैं

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार-SP) के मुखिया शरद पवार को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। मंगलवार (14 जुलाई) देर रात राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अलग-अलग मुलाकातों ने शरद पवार के अगले राजनीतिक कदम को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

इन बैठकों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या शरद पवार की पार्टी NCP (SP) एनडीए का रुख करेगी या फिर कोई नया राजनीतिक समीकरण बनने वाला है। न्यूज 18 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि NCP (SP) परिसीमन बिल के समर्थन एनडीए का साथ देगी।

सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (शरद पवार गुट) के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले मुंबई स्थित शरद पवार के आवास 'सिल्वर ओक' पर उनसे मुलाकात की। इसके बाद शाम को उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की।


इसी दौरान सत्तारूढ़ अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी मुख्यमंत्री फडणवीस से अलग बैठक की। हालांकि, इन बैठकों में क्या चर्चा हुई, इस पर किसी भी नेता या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

NCP (SP) के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती

इन बैठकों का समय इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि जुलाई 2023 में अजित पवार के बगावत कर भाजपा-शिवसेना गठबंधन (महायुति) में शामिल होने के बाद से शरद पवार गुट सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, NCP (SP) के 10 विधायकों में से कम से कम आधे विधायक BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने के पक्ष में हैं।

उनका तर्क है कि विपक्ष में रहने के कारण उनके क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए फंड और प्रशासनिक मंजूरियां हासिल करना मुश्किल हो रहा है। बताया जा रहा है कि जयंत पाटिल ने भी हाल ही में पार्टी विधायकों को इस भावना से अवगत कराया था। हालांकि, शरद पवार ने अभी तक सार्वजनिक रूप से अपनी रणनीति का खुलासा नहीं किया है।

NDA के लिए क्यों अहम है शरद पवार गुट?

हालांकि विधानसभा में NCP (SP) के केवल 10 विधायक और लोकसभा में 8 सांसद हैं, लेकिन संसद में उनकी संख्या ऐसे समय अहम मानी जा रही है जब केंद्र की भाजपा सरकार आगामी महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेषकर परिसीमन (Delimitation) विधेयक, को लेकर अपना समर्थन मजबूत करना चाहती है। जनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे में एनडीए छोटे दलों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकता है।

अजित पवार गुट में भी बढ़ी हलचल

राजनीतिक हलचल केवल शरद पवार गुट तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि शरद पवार गुट की ओर से कांग्रेस में विलय या एनडीए के साथ जाने जैसे विकल्पों पर सार्वजनिक चर्चा ने अजित पवार गुट के भीतर भी नई बेचैनी पैदा कर दी है।

इस बीच, पूर्व NCP राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के चुनाव को चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है।

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हालांकि, महाराष्ट्र NCP अध्यक्ष सुनील तटकरे ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एकजुट है और कानूनी जवाब देने का फैसला पार्टी की कोर कमेटी करेगी।

क्या फिर साथ आ सकते हैं दोनों गुट?

राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा चल रही है कि शरद पवार और अजित पवार के गुटों के बीच फिर से समझौता हो सकता है। इससे पहले यह भी अटकलें लगी थीं कि शरद पवार गुट कांग्रेस में विलय कर सकता है, लेकिन कांग्रेस के भीतर इस प्रस्ताव को लेकर सहमति नहीं बन सकी। अब एक बार फिर चर्चा का केंद्र एनडीए में शामिल होने की संभावनाएं बन गई हैं।

फिलहाल तस्वीर साफ नहीं

फिलहाल मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ हुई बैठकों के एजेंडे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलों का दौर जारी है। अब सभी की नजर शरद पवार के अगले कदम पर टिकी है, जो राज्य की राजनीति की दिशा बदल सकता है।

सुप्रिया सुले का आया बयान

इन खबरों को शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने खारिज कर दिया है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बुधवार को प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर अपनी पार्टी के रुख को लेकर लगाई जा रही अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने इस विवाद को 'छोटी सी बात का बतंगड़' बताया और कहा कि NCP (SP) ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है।

पार्टी प्रमुख शरद पवार और वरिष्ठ नेताओं जयंत पाटिल एवं शशिकांत शिंदे के साथ चर्चा के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सुले ने कहा कि ऐसी खबरें बेबुनियाद हैं जिनमें दावा किया गया है कि NCP (SP) ने विधेयक का समर्थन करने का फैसला किया है।

सुले ने कहा, "यह राई का पहाड़ बनाने जैसा है।" उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ऐसे किसी बिल पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी जो उसे अभी तक मिला ही नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं अभी किसी बिल पर बात नहीं कर रही हूं। बिल हमारे सामने नहीं है। जब यह हमें मिल जाएगा, तो हम 24 घंटे के भीतर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।"

उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब ज़ोरदार राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं कि शरद पवार के नेतृत्व वाला गुट सत्ताधारी गठबंधन से बाहर रहते हुए भी प्रस्तावित परिसीमन बिल और महिला आरक्षण कानून पर NDA को बाहर से समर्थन दे सकता है।

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