Maharashtra Civic Election Results 2026: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों के नतीजों ने महाराष्ट्र के पावर समीकरणों को बदल दिया है। इससे बीजेपी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य की राजनीतिक रैंकिंग में मजबूत स्थिति में आ गए हैं। इस जीत से भगवा पार्टी को देश की सबसे अमीर सिविक बॉडी पर भी कंट्रोल मिल गया है। BMC का सालाना बजट कई भारतीय राज्यों के बजट से कहीं अधिक है। इस रिपोर्ट को फाइल करते समय उपलब्ध रुझानों और नतीजों के अनुसार, बीजेपी-शिवसेना गठबंधन 127 सीटों पर आगे चल रहा था।
'महायुति' के भीतर बीजेपी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होकर उभरी है। पार्टी ने 2017 के चुनावों में 82 BMC वार्ड जीते थे। खबर लिखे जाने तक BJP कम से कम 99 सीटों पर आगे चल रही थी या जीत चुकी है। दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को केवल 28 सीटें ही मिल पाई। वोटों की गिनती अभी भी जारी हैं। फाइनल नतीजे शुक्रवार शाम तक आने की उम्मीद थी।
महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में बीजेपी के ऐतिहासिक प्रदर्शन का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को दिया जा रहा है। 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा में शानदार जीत के बाद फडणवीस ने 'महायुति' गठबंधन के मुख्य एजेंडे के रूप में विकास पर जोर देना जारी रखा। BMC का नतीजा शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और MNS प्रमुख राज ठाकरे के लिए एक बड़ा झटका है। दोनों चचेरे भाई दशकों पुराने मतभेदों को भुलाकर मुंबई निकाय चुनावों में एक साथ चुनाव लड़े थे।
उद्धव ठाकरे के लिए यह हार एक साल पहले हुए विधानसभा चुनावों के बाद दूसरा झटका है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परिणाम BMC पर ठाकरे परिवार के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे के अंत का संकेत देता है। इस पर उन्होंने दशकों तक राज किया। अपनी फाइनेंशियल ताकत के अलावा BMC मुंबई की राजनीति को आकार देने में अहम भूमिका निभाती है। अक्सर राज्य की बड़ी राजनीतिक दिशा को प्रभावित करती है।
फडणवीस अब न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सबसे प्रभावशाली राजनीतिक हस्ती बनकर उभरे हैं। उनके नेतृत्व में BJP ने विधानसभा में ऐतिहासिक जीत हासिल की। उसके बाद यह उनकी लीडरशिप और रणनीति ही है जिसने पार्टी को BMC में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन दिलाया है।
पूरे महाराष्ट्र में बड़े नागरिक चुनावों के नतीजों ने भी BJP के दबदबे को दिखाया। इससे पता चलता है कि न तो कांग्रेस जैसा राष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी और न ही ठाकरे एवं पवार जैसे क्षेत्रीय दिग्गज पार्टियां की संगठनात्मक ताकत का मुकाबला कर सके।
ठाकरे की तरह डिप्टी सीएम और NCP नेता अजित पवार ने भी पुणे नगर निकाय पर कंट्रोल बनाए रखने की कोशिश में अपने अलग हुए चाचा शरद पवार के साथ फिर से हाथ मिलाया। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसे कभी पवार परिवार का गढ़ माना जाता था। BMC के फैसले ने फडणवीस की स्थिति को न सिर्फ राज्य में बल्कि BJP में भी और मजबूत किया है।