ना समोसा, ना आइसक्रीम...अब स्कूलों के बाहर नहीं बिकेंगी ये चीजें, महाराष्ट्र सराकर ने दिया ये बड़ा आदेश

नए आदेश के अनुसार, ज्यादा फैट, ट्रांस फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थ (एचएफएसएस फूड) अब स्कूल परिसर या उसके 50 मीटर के आसपास न तो बेचे जा सकेंगे, न ही मुफ्त बांटे या उनका प्रचार किया जा सकेगा। यह नियम राज्य के सभी स्कूलों पर लागू होगा। इसमें सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी, आवासीय स्कूलों के साथ-साथ सीबीएसई, आईसीएसई, राज्य बोर्ड और अन्य सभी बोर्डों से जुड़े स्कूल शामिल हैं

अपडेटेड Jul 30, 2026 पर 3:52 PM
अब स्कूलों के अंदर और उनके 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री और प्रचार पर रोक लगा दी गई है।

स्कूल की छुट्टी होते ही बच्चों की भीड़ अक्सर समोसे, वड़ा पाव, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम और दूसरी जंक फूड की दुकानों पर दिखाई देती है। स्वाद के चक्कर में बच्चे रोजाना ऐसे फूड आइटम खा लेते हैं, जो उनकी सेहत पर बुरा असर डालते हैं। अब इस पर रोक लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्कूलों के अंदर और उनके 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री,  पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बच्चों को स्वस्थ खान-पान की आदतें अपनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब स्कूलों के अंदर और उनके 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री और प्रचार पर रोक लगा दी गई है।

नए नियम में क्या है?


नए आदेश के अनुसार, ज्यादा फैट, ट्रांस फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थ (एचएफएसएस फूड) अब स्कूल परिसर या उसके 50 मीटर के आसपास न तो बेचे जा सकेंगे, न ही मुफ्त बांटे या उनका प्रचार किया जा सकेगा। यह नियम राज्य के सभी स्कूलों पर लागू होगा। इसमें सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी, आवासीय स्कूलों के साथ-साथ सीबीएसई, आईसीएसई, राज्य बोर्ड और अन्य सभी बोर्डों से जुड़े स्कूल शामिल हैं। इस फैसले का असर महाराष्ट्र के करीब 1.08 लाख स्कूलों और लगभग 2 करोड़ छात्रों पर पड़ेगा।

किन चीजों पर लगी रोक?

इस आदेश के तहत स्कूलों और उनके 50 मीटर के दायरे में वड़ा पाव, समोसा, तले हुए स्नैक्स, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, मीठे पेय, चॉकलेट और आइसक्रीम जैसी जंक फूड की चीजों की बिक्री और प्रचार पर प्रतिबंध रहेगा।

स्कूलों को मानने होंगे ये नए नियम

नए आदेश के तहत अब सभी स्कूलों से उम्मीद की जाएगी कि वे:

  • स्कूल में फूड सेफ्टी डिस्प्ले बोर्ड लगाएं।
  • फूड सेफ्टी सुपरवाइजर नियुक्त करें।
  • "ईट राइट स्कूल" अभियान को लागू करें।
  • बच्चों के लिए स्वास्थ्य और वेलनेस से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दें।
  • सुरक्षित पीने का पानी, साफ रसोई, भोजन का सही तरीके से भंडारण और पूरी साफ-सफाई सुनिश्चित करें।

सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा कि इन नियमों का पालन करवाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्कूल के प्राचार्य और प्रबंधन की होगी। उन्होंने बताया कि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में इन नियमों की निगरानी स्कूल शिक्षा विभाग करेगा। वहीं, अन्य शिक्षा बोर्ड और स्थानीय निकाय अपने-अपने स्कूलों में नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि एफडीए जल्द ही पूरे महाराष्ट्र में विशेष निरीक्षण अभियान शुरू करेगा। अगर कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे नोटिस दिया जा सकता है। इसके अलावा लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है, खाद्य सामग्री जब्त की जा सकती है और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ जंक फूड पर रोक लगाना नहीं है, बल्कि बच्चों और उनके माता-पिता को स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूक करना भी है। उन्होंने बताया कि जिला और तालुका स्तर पर स्कूल प्रबंधन के साथ कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों में "ईट राइट स्कूल" अभियान के तहत बच्चों को पौष्टिक और संतुलित भोजन अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह आदेश भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के "स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार नियम, 2020" को लागू करने के लिए जारी किया गया है।

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