Maharashtra Transport Strike: महाराष्ट्र में अनेक ट्रांसपोर्टर ने ई-चालान और अन्य समस्याओं के विरोध में गुरुवार (5 फरवरी) से राज्यव्यापी 'चक्का जाम' का ऐलान किया है। ड्राइवरों ने गुरुवार आधी रात से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का फैसला लिया है। महाराष्ट्र परिवहन आयुक्त के कार्यालय में बुधवार (4 मार्च) शाम हुई वार्ता के अंतिम दौर में भी कोई खास निष्कर्ष नहीं निकलने के बाद महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट एक्शन कमेटी (M-TAC) ने कहा कि वह हड़ताल पर जाने का निर्णय लेगी।
एम-टीएसी के प्रतिनिधियों के अनुसार, ट्रांसपोर्टर मुंबई के आजाद मैदान में और राज्य के अन्य हिस्सों में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद वह रात से हड़ताल पर रहेंगे। M-TAC ने कहा कि अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान स्कूल बसें, कॉन्ट्रैक्ट पर चलने वाली बसें, निजी बसें और ट्रक, टेम्पो, टैक्सी तथा टैंकर सहित कमर्शियल वाहन नहीं चलेंगे। ट्रांसपोर्टर ने विरोध स्थलों पर अपने वाहन लाने की भी धमकी दी है।
'स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन' के पदाधिकारी अनिल गर्ग ने बुधवार को कहा था कि अगर अनिश्चितकालीन हड़ताल होती है तो शुक्रवार से राज्य भर में स्कूल बसें नहीं चलेंगी। हालांकि गुरुवार को उनकी सेवाएं प्रभावित नहीं रहेंगी। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने भी इस सप्ताह की शुरुआत में यहां महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) मुख्यालय में ट्रांसपोर्टर के साथ एक बैठक की थी। लेकिन एम-टीएसी ने कहा कि सरकार की ओर से खोखले आश्वासनों के कारण बातचीत में कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला।
सरनाइक ने ट्रांसपोर्टर से अपना आंदोलन वापस लेने की अपील करते हुए कहा था कि सरकार खड़ी गाड़ियों को जारी किए गए अन्यायपूर्ण ई-चालान को रद्द करने के बारे में सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर अनुकूल निर्णय लेगी। एम-टीएसी ने कहा कि यह आंदोलन इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक एनफोर्समेंट की मनमानी कार्रवाई तथा ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर बढ़ते फाइनेंशियल बोझ के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है।
इस सप्ताह की शुरुआत में महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट मंक्षी प्रताप सरनाइक ने मुंबई में महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (MSRTC) के हेडक्वार्टर में ट्रांसपोर्टर्स के साथ मीटिंग की। हालांकि, यूनियन के रिप्रेजेंटेटिव्स ने कहा कि बातचीत बिना किसी पक्के भरोसे के खत्म हो गई। सरनाइक ने ट्रांसपोर्टर्स से आंदोलन वापस लेने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार परमिट वाली जगहों पर पार्क की गई गाड़ियों को दिए गए गलत ई-चालान को रिव्यू करने और कैंसल करने को तैयार है।
ट्रांसपोर्ट यूनियनों का कहना है कि इस आंदोलन का मकसद मनमाने और बहुत ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक नियमों को लागू करना और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर बढ़ते पैसे के बोझ को कम करना है।
- ई-चालान सिस्टम में सुधार और पेंडिंग पेनल्टी में छूट।
- कमर्शियल गाड़ियों पर टैक्स और टोल चार्ज में कमी।
- ट्रांसपोर्टरों को 45 दिनों के अंदर ई-चालान भरने के लिए ज़रूरी नियम को वापस लेना या उसमें ढील देना।