ममता बनर्जी ने लिया I-PAC के प्रतीक जैन का फोन, ED रेड के दौरान सबूत मिटाने का आरोप

इसके जवाब में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ED दरअसल तृणमूल कांग्रेस की चुनावी तैयारी से जुड़ा आंतरिक डेटा, हार्ड डिस्क और रणनीतिक दस्तावेज़ जब्त करने की कोशिश कर रहा था, जिनका मनी लॉन्ड्रिंग जांच से कोई संबंध नहीं है

अपडेटेड Jan 09, 2026 पर 2:45 PM
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West Bengal: ममता बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने गुरुवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की रेड के दौरान दखल दिया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने गुरुवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की रेड के दौरान दखल दिया। यह छापेमारी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के ठिकानों पर हो रही थीसूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने खुद I-PAC के एक अधिकारी का फोन लिया, जिसके बाद मौजूद पुलिस अधिकारियों ने केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई को रोक दिया।

विरोध में उतरींं ममता बनर्जी 

गुरुवार को कोलकाता में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई पर ममता बनर्जी ने कड़ा एतराज जताया और केंद्रीय एजेंसी पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अहम दस्तावेज चुराने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री के विरोध के बाद यह मामला और ज्यादा तूल पकड़ता नजर आया।

फोन लेने का दावा

सूत्रों के अनुसार, जब छापेमारी चल रही थी तभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं। दावा किया जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के एक अधिकारी प्रतीक जैन का मोबाइल फोन खुद ले लिया। सूत्रों ने यह भी बताया कि घटनास्थल पर राज्य के पुलिस महानिदेशक मौजूद थे और उन्होंने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के अधिकारियों को पंचनामा में कोई रिकॉर्ड दर्ज न करने का निर्देश दिया। आरोप है कि डीजीपी ने तीन ED अधिकारियों से कहा कि वे रेड के दौरान किसी तरह की बरामदगी न दिखाएं, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।


ED नेक की ये कार्रवाई

एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के सूत्रों का दावा है कि हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि जबरदस्ती का सहारा लेना पड़ा। बताया गया कि ED के तीन अधिकारियों को मौके पर मौजूद कई पुलिसकर्मियों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की Z-कैटेगरी सुरक्षा में तैनात जवानों का सामना करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, ED अधिकारियों को कथित तौर पर धमकाया गया और उन पर दबाव डाला गया, ताकि पूरी घटना का कोई भी जिक्र आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज न हो।

सूत्रों के अनुसार, राज्य के डीजीपी ने कथित तौर पर एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की टीम को यह चेतावनी भी दी कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है और गिरफ्तारी हो सकती है। ED का यह भी दावा है कि छापेमारी के दौरान कोलकाता पुलिस के जवानों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के स्टाफ ने मौके पर मौजूद स्वतंत्र गवाहों को परेशान किया और डराने की कोशिश की। एजेंसी के मुताबिक, पूरे ऑपरेशन के दौरान उसके अधिकारियों पर लगातार दबाव और धमकियां डाली गईं, यहां तक कि कथित तौर पर आधिकारिक दस्तावेज़ों में बदलाव करने का दबाव भी बनाया गया।

इसके जवाब में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ED दरअसल तृणमूल कांग्रेस की चुनावी तैयारी से जुड़ा आंतरिक डेटा, हार्ड डिस्क और रणनीतिक दस्तावेज़ जब्त करने की कोशिश कर रहा था, जिनका मनी लॉन्ड्रिंग जांच से कोई संबंध नहीं है। ममता बनर्जी ने इन छापों को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताते हुए गैर-संवैधानिक करार दिया और कहा कि ED पार्टी के डेटा को ज़ब्त करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह अपनी पार्टी के वे दस्तावेज़ “वापस ले रही हैं”, जिनका ED के मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

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