March WPI Data : सरकार की तरफ से 14 अप्रैल को जारी आंकड़ों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी,एनर्जी की बढ़ती लागत और निर्मित उत्पादों की कीमतों में तेजी के चलते,मार्च में भारत की थोक महंगाई दर बढ़कर 38 महीने के उच्चतम स्तर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गई है। जबकि, फरवरी में यह 2.13 प्रतिशत थी। थोक महंगाई का रुख रिटेल महंगाई जैसा ही रहा। खाने-पीने की चीज़ों और खाना पकाने के ईंधन की कीमतों में बढ़त के कारण रिटेल महंगाई भी 3.21 फीसदी से बढ़कर 3.40 फीसदी पर रही है।
थोक महंगाई में सबसे तेज़ उछाल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस सेक्टर में आया है। यहां फरवरी के 2.56 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले मार्च की महंगाई दर बढ़कर 35.98 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इस कटेगरी के अंदर अकेले कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई बढ़कर 51.57 प्रतिशत हो गई है। जबकि फरवरी में इसमें 1.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
ईंधन और बिजली की महंगाई भी बढ़कर 1.05 प्रतिशत हो गई है। जबकि, फरवरी में इसमें 3.78 प्रतिशत की गिरावट आई थी। पेट्रोल की कीमतें 2.5 प्रतिशत बढ़ीं हैं। जबकि हाई-स्पीड डीज़ल की महंगाई बढ़कर 3.26 प्रतिशत हो गई है।
ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि ग्लोबल स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतें अब घरेलू थोक कीमतों पर भी असर दिखा रही हैं। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि अगर एनर्जी की कीमतें इसी तरह मजबूत बनी रहीं तो महंगाई का दबाव और भी बढ़ सकता है।
थोक बास्केट में खाने-पीने के चीजों की महंगाई फरवरी के 3.47 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 3.87 प्रतिशत हो गई। मुख्य खाद्य पदार्थों में अंडे,मांस और मछली की महंगाई 5.36 प्रतिशत से बढ़कर 6.63 प्रतिशत हो गईलहै। जबकि फलों की महंगाई 2.11 प्रतिशत और दूध की 2.62 प्रतिशत रही है।
हालांकि,कुछ कटेगरी में महंगाई कम भी हुई। गेहूं की कीमतों में 4.6 प्रतिशत की गिरावट आई,दालों की कीमतें 5.17 प्रतिशत कम हुईं,जबकि प्याज और आलू की कीमतें सालाना आधार पर काफी कम रहीं। इससे कुल खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिली।
थोक मूल्य सूचकांक में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट की महंगाई दर फरवरी के 2.92 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 3.39 प्रतिशत हो गई। कपड़ा,रसायन,चमड़े के उत्पाद और बेसिक मेटल सहित कई इंडस्ट्रियल कटेगरी में कीमतें बढ़ी हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि कच्चे माल और एनर्जी की बढ़ती लागत अब फ़ैक्टरी गेट कीमतों पर भी अपना असर दिखा रही हैं।
थोक महंगाई में बढ़ोतरी के बावजूद,रिटेल महंगाई अभी भी भारतीय रिज़र्व बैंक के 4 प्रतिशत के मध्यम-अवधि के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। हालांकि,मार्च के थोक महंगाई के आंकड़े इस बात के संकेत दे रहे हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो आने वाले महीनों में रिटेल महंगाई भी बढ़ती दिख सकती है।