Matthew Vandyke: कौन है कोलकाता में पकड़ा गया अमेरिकी मैथ्यू वैनडाइक? डॉक्यूमेंट्री मेकर जो बन गया लड़ाका और बनाया 'सन्स ऑफ लिबर्टी'

Who Is Matthew Vandyke: 2011 में वैनडाइक तब चर्चा में आया जब वो गद्दाफी के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों के साथ शामिल हो गया। वहां उसे गिरफ्तार किया गया और 6 महीने तक कालकोठरी में रखा गया। 2008 से 2010 के बीच इराक में उसे जासूसी के शक में कई बार पकड़ा गया था। सीरिया में असद सरकार ने उसे 'आतंकवादी' घोषित कर दिया था

अपडेटेड Mar 18, 2026 पर 10:07 AM
Story continues below Advertisement
वैनडाइक 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन की सेना को समर्थन दे रहा था

Matthew Vandyke: 13 मार्च को NIA ने एक साथ सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया, जिनमें छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी वैनडाइक शामिल है। वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य को दिल्ली और लखनऊ से पकड़ा गया। ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन वे मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति के घुस गए।

जांचकर्ताओं का मानना है कि इस समूह ने अवैध रूप से म्यांमार सीमा पार की और वहां के विद्रोही समूहों से संपर्क किया। इन समूहों के तार भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादियों से भी जुड़े हो सकते हैं। एनआईए को शक है कि वैनडाइक का ग्रुप विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहा था और यूरोप से लाए गए आधुनिक ड्रोन्स का इस्तेमाल सिखा रहा था।

कौन है मैथ्यू वैनडाइक?


46 साल के वैनडाइक का जीवन किसी फिल्मी थ्रिलर जैसा रहा है। एक ऐसा व्यक्ति जो दुनिया के सबसे खतरनाक युद्ध क्षेत्रों में कभी डॉक्यूमेंट्री मेकर, कभी लड़ाका तो कभी सैन्य सलाहकार बनकर पहुंच जाता है। बाल्टीमोर में जन्मे और प्रतिष्ठित जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से पढ़े वैनडाइक ने कभी साधारण जिंदगी नहीं चुनी। अपनी पढ़ाई के दौरान उसने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA में भर्ती होने की कोशिश की थी। वे कई चरणों में सफल रहा, लेकिन 'पॉलीग्राफ टेस्ट' जो झूठ पकड़ने वाली मशीन होती है उसमें फेल हो गया ।

2011 में वैनडाइक तब चर्चा में आया जब वो गद्दाफी के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों के साथ शामिल हो गया। वहां उसे गिरफ्तार किया गया और 6 महीने तक कालकोठरी में रखा गया। 2008 से 2010 के बीच इराक में उसे जासूसी के शक में कई बार पकड़ा गया था। सीरिया में असद सरकार ने उसे 'आतंकवादी' घोषित कर दिया था।

'सन्स ऑफ लिबर्टी'

2014 में ISIS द्वारा पत्रकारों की हत्या के बाद, वैनडाइक ने 'सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' नाम का एक NGO बनाया। यह संगठन खुद को उन लोगों का मददगार बताता है जो 'तानाशाही शासनों' के खिलाफ लड़ रहे हैं। असल में यह संगठन सक्रिय लड़ाकों को सैन्य प्रशिक्षण और सलाह देने का काम करता है।

यूक्रेन से म्यांमार तक का सफर

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से वैनडाइक यूक्रेन की सेना को समर्थन दे रहा था। 2025 के अंत तक उसके बयानों से संकेत मिले थे कि वो अब रूस के सहयोगियों जैसे- म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहता है। यही कारण है कि वो म्यांमार सीमा के करीब सक्रिय पाया गया।

भारत के लिए क्यों है चिंता की बात?

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का इतिहास उग्रवाद से भरा रहा है। ऐसे में किसी विदेशी नागरिक का प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसना और सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देना भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। भारत सरकार ने इस गिरफ्तारी के जरिए साफ कर दिया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी विदेशी संघर्ष या उग्रवाद के लिए 'बेस' के रूप में नहीं होने देगी।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।