Meenakshi Natarajan News: मध्य प्रदेश से अपनी राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती देते हुए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संभावना है कि पार्टी गुरुवार (11 जून) को कोर्ट की वेकेशन बेंच के सामने इस मामले का जिक्र करके तत्काल सुनवाई की मांग करेगी। उम्मीद की जा रही है कि गुरुवार (11 जून) को कोर्ट की वेकेशन बेंच के सामने इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए इसे उठाया जाएगा। यह कदम बीजेपी की आपत्तियों के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नटराजन के नामांकन पत्र रद्द करने के बाद उठाया गया है।
खबरों के मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने नटराजन का आवेदन इसलिए खारिज कर दिया था क्योंकि उन पर आरोप था कि उन्होंने नामांकन पत्रों में तेलंगाना में अपने खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी। सत्ताधारी पार्टी BJP का दावा है कि कांग्रेस नेता ने अपने नामांकन पत्रों के साथ दिए गए हलफनामे में तेलंगाना में चल रहे एक कानूनी मामले के बारे में जानकारी नहीं दी थी।
नटराजन के नामांकन के खिलाफ दायर आपत्ति के अनुसार, पूर्व कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव ए श्रीलता ने चौथे अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया था, जिन पर श्रीलता ने छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, नटराजन ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है। हैदराबाद की अदालत में श्रीलता की याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि यह उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।
इससे पहले बुधवार को नटराजन ने आरोप लगाया था कि रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) सरकार के इशारे पर काम कर रहे थे। नटराजन मध्य प्रदेश से कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार थीं। लेकिन BJP की ओर से एक बड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद उनके नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए। BJP का आरोप था कि उन्होंने तेलंगाना की अदालत में लंबित एक मामले के बारे में जानकारी छिपाई थी।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में नटराजन ने कहा, "हम एक ऐसे रणक्षेत्र में हैं जहां कांग्रेस नेता न सिर्फ विपक्षी पार्टी के खिलाफ लड़ रहे हैं। दुर्भाग्य से हमारे संविधान बनाने वाले पूर्वजों ने जो संस्थाएं बनाई थीं, उनका अब अनादर हो रहा है और वे इस तरह से प्रभावित दिखती हैं कि हमें लगता है कि हम उनके खिलाफ भी लड़ रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि कोई फॉर्म भरना कैसे नहीं जान सकता? इसमें कुछ भी कानूनी या तकनीकी नहीं है। यह सिर्फ राजनीतिक दुर्भावना है, जो हमने कल हर कदम पर देखी कि कैसे लोकतंत्र को कमज़ोर करने की कोशिशें की जा रही थीं। भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहूंगी कि कल रिटर्निंग ऑफिसर निष्पक्ष नहीं थे। वे मौजूदा सरकार के प्रवक्ताओं और उनके फ्रंटल संगठनों के प्रमुखों की तरह काम कर रहे थे।
चुनाव आयोग से भी कांग्रेस ने की शिकायत
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से अपनी राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ बुधवार को निर्वाचन आयोग से शिकायत की। इस दौरान आग्रह किया कि निर्वाचन अधिकारी (आरओ) के संविधान एवं गणतंत्र विरोधी फैसले को तत्काल निरस्त किया जाए। पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग पहुंचकर इस मामले में पार्टी का पक्ष रखा और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य आयुक्तों को ज्ञापन भी सौंपा।
इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव जयराम रमेश, भूपेश बघेल, रणदीप सुरजेवाला और वरिष्ठ नेता दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा एवं अभिषेक सिंघवी शामिल थे। इसमें खुद नटराजन भी मौजूद थीं। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मुलाकात के बाद वेणुगोपाल ने कहा कि हमने भारत निर्वाचन आयोग के साथ विस्तार से चर्चा की। उनके सामने तथ्य एवं आंकड़े रखे।
कांग्रेस नेता के अनुसार, यह नहीं कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग किसी भी तरह से असहाय है। शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को रद्द कर दिया गया। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को मतदान होना है।