मिडिल ईस्ट संकट: PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात, शांति के लिए 'डायलॉग और डिप्लोमेसी' का दिया मंत्र

US Iran War: प्रधानमंत्री की बातचीत के साथ-साथ भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और ब्रिक्स (BRICS) से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। युद्ध के खतरे को देखते हुए ईरान में रह रहे भारतीयों को सुरक्षित निकालने का काम जारी है

अपडेटेड Mar 13, 2026 पर 5:41 PM
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MIddle East War: PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात, शांति के लिए 'डायलॉग और डिप्लोमेसी' का दिया मंत्र

मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति बहाली पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने जानकारी दी है कि भारत सरकार मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालात पर पैनी नजर रखे हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय चर्चा की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से फोन पर विस्तार से बात की। इस दौरान पीएम मोदी ने साफ किया कि वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कुशलता भारत की पहली प्राथमिकता है।

उन्होंने ऊर्जा और जरूरी सामानों की आवाजाही (Transit of energy) को बिना किसी रुकावट के जारी रखने की अहमियत पर भी चर्चा की।


PM मोदी की शांति का रास्ता अपनाने की अपील

क्षेत्र में बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता जताते हुए पीएम ने कहा कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। भारत का रुख साफ है कि विवादों को 'बातचीत और कूटनीति' के जरिए जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए।

विदेश मंत्रियों के बीच भी हुई चर्चा

प्रधानमंत्री की बातचीत के साथ-साथ भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और ब्रिक्स (BRICS) से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

युद्ध के खतरे को देखते हुए ईरान में रह रहे भारतीयों को सुरक्षित निकालने का काम जारी है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में कुल 170 भारतीय नागरिक सड़क मार्ग के जरिए ईरान की सीमा पार कर आर्मीनिया पहुंच चुके हैं।

इनमें से कई लोग पहले ही भारत लौट आए हैं, जबकि बाकी बचे लोग आर्मीनिया से उपलब्ध कमर्शियल फ्लाइट्स के जरिए अगले कुछ दिनों में स्वदेश पहुंच जाएंगे।

भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपना पक्ष दोहराया है कि हिंसा की जगह कूटनीतिक बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और आम नागरिकों को नुकसान न हो।

इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि ओमान के सोहार शहर में हुए हमले में दो भारतीय नागरिक मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। घटना के बारे में बात करते हुए अतिरिक्त सचिव (गल्फ) असीम आर महाजन ने कहा कि कुल 11 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 10 भारतीय शामिल हैं।

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