Monsoon 2026 Update: हिंद महासागर में अजीबोगरीब घटना! इस कारण केरल में दस्तक नहीं दे रहा मानसून

Monsoon 2026 Update: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून चार जून के आसपास दस्तक दे सकता है। केरल में मानसून आम तौर पर 1 जून के आसपास पहुंच जाता है, जिसे दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम (जून-सितंबर) की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है

अपडेटेड Jun 03, 2026 पर 11:23 AM
Monsoon 2026 Update: केरल में चार जून तक मानसून दस्तक दे सकता है

Monsoon 2026 Update: जून का महीना शुरू हो चुका है। लेकिन भारत अभी भी दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार कर रहा है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून चार जून के आसपास दस्तक दे सकता है। आम तौर पर केरल में मानसून 1 जून के आसपास पहुंच जाता है। इसे दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम (जून-सितंबर) की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस साल इसकी शुरुआत कुछ दिनों देर से हो रही है, जिससे पूरे देश के लोग आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

IMD पूर्वानुमान के मुताबिक, मानसून दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों तथा दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के बाकी भागों में भी इसी तारीख के आसपास आगे बढ़ेगा। IMD ने पहले अनुमान जताया था कि केरल में मानसून की दस्तक 26 मई के आसपास होगी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ।

फिर बाद में मौसम विभाग ने 29 मई को कहा कि मानसून अगले हफ्ते पहुंच सकता है। पिछले हफ्ते विभाग ने अपने संशोधित पूर्वानुमान में कहा कि इस बार मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहेगी। IMD ने कहा कि भारत में इस साल दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की 90 फीसदी बारिश होने की संभावना है।


एलपीए से आशय किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित अवधि (जैसे कि एक महीने या एक मौसम) के दौरान दर्ज की गई बारिश से है। इसका औसत आमतौर पर 30 से 50 वर्षों की लंबी अवधि के आधार पर निकाला जाता है। देशभर में मौसमी बारिश का औसत एलपीए 87 सेंटीमीटर है, जो 1971 से 2020 तक के आंकड़ों पर आधारित है। सामान्य से कम बारिश का एक कारण अल-नीनो की स्थिति का उभरना हो सकता है, जिसके चलते देश में मानसून के मौसम में कम पानी बरसता है।

मानसून आने में क्यों हो रही देरी?

मौसम वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि मानसून की धीमी रफ्तार के पीछे एक मुख्य वजह हिंद महासागर में छाई एक अजीब सी शांति है। आमतौर पर हिंद महासागर मानसून के मौसम के लिए एक 'कारखाने' की तरह काम करता है। महासागर का गर्म पानी बारिश लाने वाले बादल बनाने और कम दबाव वाले सिस्टम तैयार करने में मदद करता है। ये फिर उत्तर की ओर भारत की तरफ बढ़ते हैं। लेकिन इस समय, यह 'कारखाना' अजीब तरह से शांत पड़ा है।

सैटेलाइट से सामने आई तस्वीरों में भारत के दक्षिण में आसमान का एक बहुत बड़ा हिस्सा साफ दिखाई दे रहा है। वहां न के बराबर बादल बन रहे हैं। और न ही बारिश लाने वाले कोई सिस्टम तैयार हो रहे हैं। जब तक ये नए सिस्टम बनकर उत्तर की ओर नहीं बढ़ेंगे, तब तक मानसून की हवाएं पूरी ताकत नहीं पकड़ पाएंगी। इससे देश के अंदरूनी हिस्सों तक मानसून नहीं पहुंच पाएंगी। इसी वजह से केरल और देश के दूसरे मुख्य हिस्सों में अभी तक पूरी तरह से बारिश शुरू नहीं हो पाई है। हालांकि, कहीं-कहीं मानसून से पहले की हल्की-फुल्की बारिश देखने को मिल रही है।

'अल नीनो' की वजह से हो रही देरी?

प्रशांत महासागर में उभर रहा 'अल नीनो' (El Nino) अक्सर हवाओं के बहाव को बदलकर और बारिश को उस क्षेत्र से दूर हटाकर भारत के मानसून को कमज़ोर कर देता है। IMD ने पहले ही यह अनुमान लगाया है कि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य बारिश का सिर्फ़ लगभग 90% ही लाएगा, जिसे "सामान्य से कम" की कैटेगरी में रखा गया है।

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लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मानसून बिल्कुल भी नहीं आएगा। असल में, IMD के मौसम मॉडलों के हालिया अपडेट के अनुसार, आने वाले दिनों में मानसून की शुरुआत हो सकती है। कुल मिलाकर स्थिति सावधानी बरतने का संकेत देती है। बारिश के असमान होने और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।

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