Monsoon June Pause: मानसून की रफ्तार जून में क्यों थम गई? IMD की इन सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता, आया ये अपडेट
Monsoon June Pause: कुछ दिनों पहले तक जो मानसून तय समय से काफी आगे चल रहा था अब उसकी चाल मध्य और पश्चिमी भारत में आकर पूरी तरह ठप हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय इसरो और वैश्विक मौसम एजेंसियों की ताजा सैटेलाइट तस्वीरें बनी हुई हैं। इनमें जून के मध्य में भी भारत का एक बड़ा हिस्सा बिना मानसूनी बादलों के बिल्कुल साफ नजर आ रहा है
Monsoon June Pause: मौसम की इस बेरुखी के पीछे सबसे बड़ा वैश्विक कारण अल नीनो है
Monsoon June Pause: जून की शुरुआत में रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार से आगे बढ़ रहे दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्पीड में अचानक ब्रेक लगता नजर आ रहा है। कुछ दिनों पहले तक जो मानसून तय समय से काफी आगे चल रहा था अब उसकी चाल मध्य और पश्चिमी भारत में आकर पूरी तरह ठप हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय इसरो और वैश्विक मौसम एजेंसियों की ताजा सैटेलाइट तस्वीरें बनी हुई हैं।
इनमें जून के मध्य में भी भारत का एक बड़ा हिस्सा बिना मानसूनी बादलों के बिल्कुल साफ नजर आ रहा है। मौसम विभाग (IMD) के इस नए अपडेट ने कृषि क्षेत्र और मौसम विदों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि मध्य भारत में बारिश की कमी का आंकड़ा 65 फीसदी तक पहुंच गया है।
1. सैटेलाइट तस्वीरों ने क्यों बढ़ाई मौसम वैज्ञानिकों की चिंता?
हमारे सहयोगी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय मौसम उपग्रह Meteosat, अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA और इसरो के INSAT-3DS सैटेलाइट से प्राप्त ताजा तस्वीरों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। आमतौर पर जून के मध्य तक भारत के जिन हिस्सों में घने मानसूनी बादलों की पट्टियां होनी चाहिए थीं वहां आसमान पूरी तरह साफ है।
मध्य, पश्चिमी और प्रायद्वीपीय भारत के विशाल भूभाग पर मानसूनी बादलों की भारी कमी साफ देखी जा सकती है। अंतरिक्ष से ली गई ये तस्वीरें इस बात का सबसे बड़ा सबूत हैं कि मानसून की प्रगति में एक बड़ा पॉज आ गया है।
2. जमीन पर दिखने लगा असर: मध्य भारत में 65% बारिश की कमी
मानसून की इस सुस्ती का सीधा और खतरनाक असर अब जमीन पर दिखने लगा है। IMD के आंकड़ों के मुताबिक 4 जून से 16 जून के बीच मध्य भारत में सामान्य से 65 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इससे यह देश का सबसे प्रभावित मौसम क्षेत्र बन गया है।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उनके आसपास के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है लेकिन इस दौरान वहां नाममात्र की भी मानसूनी बारिश नहीं हुई है।
3. धमाकेदार शुरुआत के बाद सोलापुर में क्यों अटक गया मानसून?
इस बार मानसून की शुरुआत बेहद शानदार रही थी। दक्षिण-पश्चिम मानसून अपनी सामान्य तारीख (1 जून) से तीन दिन बाद यानी 4 जून 2026 को केरल पहुंचा था। लेकिन इसके बाद इसने बेहद तेज रफ्तार पकड़ी। जून के दूसरे हफ्ते तक मानसून ने केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और पूरे पूर्वोत्तर भारत को कवर कर लिया था। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी इसकी एंट्री हो गई थी।
कहां रुकी रफ्तार?
इसके बाद मानसून अचानक ठिठक गया। महाराष्ट्र के सोलापुर क्षेत्र में मानसून पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से अटका हुआ है। विदर्भ में आमतौर पर मानसून 15 जून तक पहुंच जाता है। वहां के किसान अब भी इंतजार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अब मानसून अपनी सामान्य तारीख से 5 से 10 दिन की देरी से पहुंचने की आशंका है। जैसे लखनऊ में जहां मानसून 23 जून तक आता था अब वहां जून के अंत या जुलाई के पहले हफ्ते में दस्तक दे सकता है।
4. अचानक क्यों मासून की स्पीड पर लगा ब्रेक? ये हैं 3 बड़े कारण
मौसम वैज्ञानिकों ने मानसून की रफ्तार अचानक थमने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। जून में मानसून को आगे धकेलने के लिए बंगाल की खाड़ी में मजबूत कम दबाव के क्षेत्र बनते हैं। ये इंजन की तरह काम करते हुए नमी को देश के अंदरूनी हिस्सों तक खींचते हैं। इस साल जून में ऐसे सिस्टम पूरी तरह गायब हैं।
उत्तर और मध्य भारत में व्यापक बारिश कराने वाली मानसून ट्रफ (कम दबाव वाली बेल्ट) इस समय बेहद कमजोर स्थिति में है। उत्तर भारत में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ ने भी मानसूनी हवाओं के सामान्य प्रवाह को बाधित कर दिया है।
5. अल नीनो का साया और मंडराता खतरा
मौसम की इस बेरुखी के पीछे सबसे बड़ा वैश्विक कारण अल नीनो है। आईएमडी (IMD) ने पहले ही चेतावनी दी है कि जून से सितंबर के इस मानसून सीजन के दौरान मध्यम से मजबूत अल नीनो स्थितियां बनी रह सकती हैं।
अल नीनो के वर्षों में मानसूनी हवाओं का चक्र कमजोर हो जाता है, जिससे भारत में बारिश कम होती है। रही सही कसर हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) ने पूरी कर दी है, जो इस समय पूरी तरह न्यूट्रल बना हुआ है। यानी यह अल नीनो के बुरे प्रभाव को कम करने में कोई मदद नहीं कर पा रहा है।
6. मानसून थमा है, तो कुछ इलाकों में बारिश क्यों हो रही है?
सैटेलाइट तस्वीरों में बादल गायब होने के बावजूद देश के कुछ हिस्सों में बारिश हो रही है। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति है। वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि जून में होने वाली हर बारिश मानसून की नहीं होती। नागपुर और विदर्भ के कुछ हिस्सों में हाल ही में हुई बारिश पूरी तरह से स्थापित मानसूनी हवाओं के कारण नहीं बल्कि स्थानीय थंडरस्टॉर् और क्षेत्रीय नमी के कारण हुई थी। पूर्वोत्तर भारत और देश के पूर्वी हिस्सों में बंगाल की खाड़ी शाखा की नजदीकी और वहां की भौगोलिक स्थिति के कारण स्थानीय स्तर पर भारी बारिश जारी है, जबकि देश के बाकी हिस्सों में मानसूनी बादलों का टोटा है।
7. क्या अभी से इस बात की चिंता करनी चाहिए?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून कभी भी एक समान नहीं चलता। इसमें हमेशा सक्रिय और कमजोर चरण आते रहते हैं। पहले भी कई बार जून की कमी को जुलाई की भारी बारिश ने पूरा किया है। इस बार कमजोर क्लाउड कवर, मध्य भारत में 65% कम बारिश और अल नीनो का एक साथ एक्टिव होना चिंता जरूर बढ़ाता है।
धान, सोयाबीन, कपास और दालों की खेती के लिए अगले दो हफ्ते बेहद क्रिटिकल होने वाले हैं। अगर जून के अंत तक बंगाल की खाड़ी में कोई नया सिस्टम बनता है और मानसून दोबारा सक्रिय होता है तो किसानों का नुकसान टाला जा सकता है। अगर जुलाई में यह ड्राई स्पेल खिंचा तो जलाशयों के जल स्तर और देश की कृषि पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।