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Monsoon Rain crisis: 18 जून तक इस इलाके में हुई सिर्फ 2% बुवाई, बारिश का ये आंकड़ा तो डरा रहा है!

Monsoon Rain crisis: मराठवाड़ा मध्य महाराष्ट्र का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है। यहां की खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। पीटीआई ने एक रिपोर्ट को कोट करते हुए बताया है कि यहां बारिश में देरी से बुवाई के आंकड़ों में ऐतिहासिक गिरावट आई है। इस साल 18 जून तक पूरे क्षेत्र में अब तक केवल 1.07 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर ही बुवाई हो पाई है। पिछले साल इसी दिन तक यह आंकड़ा 10.77 लाख हेक्टेयर था

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Jun 22, 2026 पर 7:32 PM
Monsoon Rain crisis: 18 जून तक इस इलाके में हुई सिर्फ 2% बुवाई, बारिश का ये आंकड़ा तो डरा रहा है!
Monsoon Rain Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्ती और बारिश में हो रही देरी ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।

Monsoon Rain Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्ती और बारिश में हो रही देरी ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। पानी की कमी और रूठे मानसून की वजह से इस क्षेत्र के आठ जिलों में खरीफ की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक मराठवाड़ा में बुवाई का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले महज 2 प्रतिशत रह गया है। सूखे की मार झेलने वाले इस इलाके के किसानों और प्रशासन के लिए बारिश और बुवाई का यह आंकड़ा बेहद डराने वाला है।

बुवाई के आंकड़े: 10 लाख हेक्टेयर के मुकाबले सिर्फ 1 लाख हेक्टेयर

मराठवाड़ा मध्य महाराष्ट्र का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है। यहां की खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। पीटीआई ने एक रिपोर्ट को कोट करते हुए बताया है कि यहां बारिश में देरी से बुवाई के आंकड़ों में ऐतिहासिक गिरावट आई है। इस साल 18 जून तक पूरे क्षेत्र में अब तक केवल 1.07 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर ही बुवाई हो पाई है। पिछले साल इसी दिन तक यह आंकड़ा 10.77 लाख हेक्टेयर था। पिछले पांच वर्षों में इस पूरे क्षेत्र में औसतन लगभग 49.72 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसलें बोई जाती रही हैं। आंकड़ों से साफ है कि पिछले साल 18 जून तक जितनी बुवाई हुई थी, उसकी तुलना में इस साल अब तक केवल 2 प्रतिशत ही बुवाई हो सकी है।

जिलावार बुवाई का हाल (बीड सबसे आगे, लातूर सबसे पीछे)

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