देश की धरोहर और सभ्यता की विरासत को सहेजने की कोशिश में एक कदम आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घाटन किया है। इसमें राष्ट्रपति भवन में दशकों से रखे ब्रिटिश युग के औपनिवेशिक साहित्य की जगह 11 शास्त्रीय भाषाओं में भारतीय साहित्य को शामिल किया गया है। इससे पहले राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश-काल के एडीसी के चित्रों को देश के परमवीर चक्र विजेताओं के चित्रों से बदला गया था। ग्रंथ कुटीर के संग्रह में शामिल भारतीय शास्त्रीय ग्रंथ में संस्कृत में वेद, पुराण और उपनिषद, गाथासप्तशती, सबसे पुराना ज्ञात मराठी साहित्य, पाली में विनय पिटक है, जैन आगम और प्राकृत शिलालेख हैं।
