MP News: पीएम मोदी की मिमिक्री करना पड़ा भारी! मध्य प्रदेश के सरकारी टीचर सस्पेंड, कार्रवाई के बाद में दी सफाई

MP News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर से 170 किलोमीटर दूर एक गांव में एक सरकारी टीचर ने वह वीडियो बनाई। एक वायरल वीडियो में सरकारी टीचर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोलने के अंदाज की नकल करते हुए देखा था। वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया

अपडेटेड Mar 16, 2026 पर 12:49 PM
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MP News: पीएम नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करना मध्य प्रदेश के एक सरकारी टीचर को भारी पड़ गया है

MP News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैली की मिमिक्री करते हुए बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एक सरकारी टीचर को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक विधायक की शिकायत के बाद की गई। इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि अब लोकतंत्र में सवाल पूछना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी अपराध बन गया है।

जिला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि पोहरी विकासखंड के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के टीचर साकेत पुरोहित ने हाल में एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था। अधिकारी ने बताया कि कथित वीडियो में उन्होंने प्रधानमंत्री की शैली की मिमिक्री करते हुए गैस सिलेंडर की कीमतों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी।

वीडियो में शिक्षक यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि गैस के दाम बढ़ने से लोग फिर से चूल्हे की रोटी खाने लगेंगे जिससे अमीर और गरीब के बीच की दूरी कम हो जाएगी। शिक्षक का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। इसके बाद पिछोर क्षेत्र से बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी ने जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी।


क्या है आरोप?

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक सरकारी शिक्षक द्वारा इस प्रकार प्रधानमंत्री और जनप्रतिनिधियों की मिमिक्री करते हुए टिप्पणी करना सरकारी सेवा आचरण नियमों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि इससे समाज में अनुचित संदेश जाता है। जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच कराई, जिसमें शिक्षक के कृत्य को शासकीय सेवकों के आचरण नियमों के प्रतिकूल माना गया। श्रीवास्तव ने बताया कि इसके बाद मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत साकेत पुरोहित को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

निलंबन आदेश के मुताबिक निलंबन अवधि में शिक्षक का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बदरवास निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। निलंबित शिक्षक साकेत पुरोहित ने कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए कहा कि उन्हें न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि बिना सुनवाई के की गई कार्रवाई उचित नहीं है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि जब प्रदेश की जनता महंगी गैस, पेट्रोल-डीजल और बढ़ती महंगाई से परेशान है। तब जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय एक शिक्षक को निलंबित करना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि बड़ा सवाल यह है कि आज युवाओं और कर्मचारियों के साथ जो हो रहा है, क्या यह एक बड़ी मिमिक्री नहीं है?

सिंघार ने X पर लिखा, "मोदी सरकार को यह समझना होगा कि जनता की पीड़ा और सवालों को दबाकर समस्याएं खत्म नहीं होतीं। अगर जनता की समस्याएं जस की तस रहें। सवाल उठाने वालों को सजा दी जाए तो यह लोकतंत्र नहीं बल्कि आवाज दबाने की प्रवृत्ति बन जाती है।" नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को दंड नहीं, जनता की समस्याओं का जवाब और समाधान देना चाहिए।

टीचर की सफाई

पुरोहित शिवपुरी जिले के सरकारी प्राथमिक स्कूल में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को पढ़ाते हैं। उन्होंने 'इंडियन एक्सप्रेस' से कहा, "अपनी जवानी में मैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। जब मैंने कुछ परीक्षाएं पास कर लीं, तो मैंने शिक्षा व्यवस्था में शामिल होने का फैसला किया।" उन्हें 2014 में स्थानीय प्राथमिक स्कूल में तैनात किया गया था। पुरोहित पहले भी स्थानीय रक्तदान शिविरों में अपने योगदान और Covid-19 महामारी के दौरान अपने काम को लेकर सुर्खियों में रहे हैं।

उन्होंने बताया कि आदेश आने से पहले उसे कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया था। टीचर ने पत्रकारों से कहा, "मेरी बात सुने बिना कार्रवाई करना सही नहीं है। मुझे रात में निलंबित कर दिया गया। मुझे कारण बताओ नोटिस भी नहीं भेजा गया है।" टीचर ने कहा, "मैं तो बस लोगों को हंसाना चाहता था।"

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टीचर ने आगे कहा, "Covid-19 महामारी के दौरान, जब ऑक्सीजन सिलिंडर की भारी कमी हो गई थी, तो मैंने एक सामुदायिक चंदा अभियान चलाया। हमने 3.5 लाख रुपये जमा किए। उस समय, अखबारों ने मेरे सामाजिक काम के लिए मुझ पर कहानियाँ लिखी थीं। अब, वे मुझ पर शांति भंग करने का आरोप लगा रहे हैं।"

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